फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जेल में बंद भाइयों को राखी नहीं बांध पाएंगी बहनें

विज्ञापन
विज्ञापन
जिला और केंद्रीय कारागार में बंद बंदियों और कैदियों को उनकी बहनें इस बार रक्षाबंधन पर राखी नहीं बांध पाएंगी। कोरोना संक्रमण के कारण बंदियों से मुलाकात पर पाबंदी रहेगी। कारागार के अधिकारियों के अनुसार, ऐसा संभवत: पहली बार होगा।
विज्ञापन

कोरोना संक्रमण के कारण बनारस सहित प्रदेश भर की जेलों में बंद बंदियों और उनके परिजनों की मुलाकात पर 22 मार्च से पाबंदी लगी हुई है। मुलाकात का सिलसिला कब शुरू होगा, इस संबंध में शासन स्तर से कोई निर्देश भी नहीं आया है। मौजूदा समय में जिला जेल में 2025 बंदी और केंद्रीय कारागार में 1739 कैदी बंद हैं। कोरोना के संक्रमण को देखते हुए बीते दिनों जिला जेल के 68 कैदी और 390 बंदी पैरोल और अंतरिम जमानत पर छोड़े गए थे। ऐसा इसलिए किया गया था ताकि सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन हो सके। हालांकि इससे कोई खास फायदा नहीं हुआ, कारण कि अभी जिला और केंद्रीय कारागार में क्षमता से तीन गुना ज्यादा बंदी और कैदी हैं। रक्षाबंधन के दिन हर साल बंदियों की बहनें जेल आती थीं और अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती थी, लेकिन इस बार ऐसा संभव नहीं है। जेल अधिकारियों का कहना है कि मुलाकात शुरू होगी तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाएगा। इसी वजह से ही जो भी लोग आपराधिक मामलों में गिरफ्तार किया जा रहे हैं, उन्हें पहले अस्थायी जेल में रखा जा रहा है। जांच में जब पुष्टि हो जाती है कि वे स्वस्थ हैं, तभी जिला जेल में दाखिल किया जाता है।
बंदियों और उनके परिजनों की मुलाकात पर फिलहाल पाबंदी लगी हुई है। रक्षाबंधन पर भी यही व्यवस्था रहेगी। कारागार के गेट पर बने काउंटर पर आकर अपना नाम-पता दर्ज कराकर एक अगस्त की शाम चार बजे तक राखी, चंदन व चावल एक लिफाफे में बंदियों के लिए दिए जा सकते हैं। -पवन कुमार त्रिवेदी, अधीक्षक, जिला कारागार
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें