छात्रों से संवाद कर उनकी जिज्ञासाओं को किया शांत
- फोटो : अमर उजाला
सद्गुरू ने छात्रों के डिमांड पर उनके साथ कार्यक्रम के बाद अलय अलय पर डांस किया। इस दौरान पूरे छात्र जोश में आ गए। कई छात्र उनके पास जाने लगे तो प्राक्टोरियल बोर्ड के सदस्यों ने सुरक्षा घेरा बनाकर सद्गुरू को भीड़ से बाहर निकाला।
दिया संदेश-खुद का निर्माण करो
सदगुरु ने बीएचयू के छात्रों को संदेश दिया कि खुद का निर्माण करो और आगे बढ़ो। अपना निर्माण करोगे तो समाज का निर्माण होगा। समाज का निर्माण होगा तो देश का निर्माण होगा। देश का निर्माण होगा तो विश्व का निर्माण होगा। इसलिए खुद का निर्माण करो।
बीएचयू पहुंचने से पहले सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने अपनी एक तस्वीर के साथ फोटो ट्विटर पर पोस्ट किया। इसमें उन्होंने मणिकर्णिका महाश्मासान को काशी का दिल बताया। इशके साथ ही उन्होंने लिखा कि यह पूर्व घोषित है कि जन्म और मौत निश्चित है।
आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव
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सद्गुरु ने छात्रों के उत्तरदायित्व और रोजगार के सवाल पर कहा कि किसी भी चीज का उत्तरदायित्व आपके उत्तर एवं योग्यता पर निर्भर करता है। आपका उत्तर आपकी योग्यता से पहचाना जाता है। पुरुष प्रभुत्व पर उन्होंने कहा कि यह परंपरा पुराने समय से चली आ रही है, जहां पर पुरुष अपने शारीरिक बल से महिलाओं पर अपना प्रभुत्व स्थापित करते थे और यही मानसिकता आज भी देखने को मिलती है। सामाजिक दबाव पर कहा कि आज के समय में हमें अगर कुछ मिलता है तो उसके बदले में हमें एक लागत चुकता करनी पड़ती है, और इसी के कारण वर्तमान समय में हम आज सामाजिक दबाव से गुजर रहें हैं। यह स्वाभाविक है। किसी का कष्ट या दु:ख उसकी अपनी व्यक्तिगत समस्या है और इस समस्या को सार्वजनिक बनाना महज एक बेवकूफी है।
सवाल पूछने वाले बीएचयू के छात्र
सदगुरु से सवाल करने वालों में राजनीति विज्ञान तृतीय वर्ष की आयुषी और रिसर्च स्कालर सुशांत रहे। इनके अलावा सदगुरू के साथ पैनल में विधि संकाय से सारांश चतुर्वेदी, चिकित्सा विज्ञान संस्थान से अदिति उपाध्याय और सामाजिक विज्ञान संकाय से प्रियांशु सिंह रहे। कार्यक्रम के दौरान छात्रों को एक वीडियो दिखाया गया जिसमें छात्र अपने टीचर से सवाल पर सवाल पूछते हैं। परेशान टीचर आखिरकार झल्लाकर बोलता है कि मुझसे सवाल न करो बल्कि सदगुरुसे पूछो। इस वीडियो के खत्म होने पर छात्रों ने खूब तालियां बजाई। सदगुरु ने सोशल मीडिया के बारे में कहा कि समाज को यह समझना चाहिए कि क्या गलत है और क्या सही? और किसी भी प्रकार की चीजों पर आंख मूंद कर भरोसा नहीं करना चाहिए।
आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव
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सदगुरू ने बताया कि मैसूर की चामुंडी पहाडि़यों पर चढ़े और एक चट्टान पर बैठ गए। उन्हें शरीर से परे का अनुभव हुआ। उन्हें लगा कि अपने शरीर में नहीं है बल्कि हर जगह फैल गए हैं। यह अनुभव कई बार हुआ। हर बार यह उन्हें परमानंद की स्थिति में छोड़ जाता। इस घटना ने उनकी जीवन शैली बदल दी।
कहानी सुनाई
सदगुरु ने मैंगोे मेडिटेशन को निष्फल बताते हुए उन्होंने कहा कि आम का पौधा लगाने की बात सोच लेने से फल नहीं मिलता। आम का पौधा लगाकर सींचने से ही समय आने पर फल मिलेगा। गड्ढा खोदने वाले और पाटने वाले की कहानी सुनाकर छात्रों का दिल जीत लिया।
उन्होंने बताया कि एक आदमी सड़क किनारे गड्ढा खोद रहा था, पीछे दूसरा व्यक्ति उस गड्ढे को पाट रहा था। इन दोनों से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि वे अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। इन दोनों के काम के बीच तीसरा व्यक्ति पौधा लगाने वाले गुम था।
बीएचयू कुलपति संग आध्यात्मिक गुरु जग्गी वासुदेव
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