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सद्गुरु जग्गी वासुदेव का बीएचयू विद्यार्थियों संग 'यूथ एंड ट्रूथ' संवाद, पूछे गए ये सवाल

Mon, 24 Sep 2018 09:18 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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छात्रों से रूबरू हुए सद्गुरु जग्गी वासुदेव - फोटो : अमर उजाला
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ईशा फाउंडेशन के संस्थापक व आध्यात्मिक संत सद्गुरु जग्गी वासुदेव सोमवार सुबह बीएचयू पहुंचे। सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने काशी को टावर ऑफ लाइफ बताया हैै। बीएचयू में छात्रों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए  सद्गुरु ने कहा कि यह महज एक शहर नहीं बल्कि एक यंत्र है, जिसका उपयोग यहां के रहने वाले नागरिकों को वह चीज प्राप्त करने के लिए करना है जिसे वे अपनी पूरी जिंदगी न प्राप्त कर पाएं। 
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सोमवार को बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान के शताब्दी सभागार में सामाजिक बहिष्करण एवं समावेशी नीति अध्ययन केन्द्र की ओर से यूथ एंड ट्रूथ कार्यक्रम हुआ। इसमें पहुंचे सद्गुरु ने छात्रों के साथ संवाद किया। उन्होंने कहा कि हम भगवान को पाने के लिए पूजा नहीं करते, बल्कि मोक्ष की प्राप्ति के लिए पूजा करते हैं। सबसे नाजुक मशीन हमारा शरीर है।

शरीर के अंगों के रूप में मशीन का अविष्कार हुआ है। कान सुनने के लिए इसलिए मोबाइल और टेलीफोन का अविष्कार हुआ है। आंख देखने के लिए हैं तो टेलीस्कोप, दूरबीन आदि के अविष्कार हुए हैं। सद्गुरु ने कहा कि मनुष्य को भगवान कहना गलत है। टाइम इज मनी नहीं है टाइम इज लाइफ है। पुराने संत महात्माओं के समय तकनीक जैसी चीज नहीं थी। इसलिए जनता के बीच प्रभाव नहीं पड़ रहा था। यही कारण है कि महात्मा बुद्ध ने जब देखा कि उनकी बातों का प्रभाव जनता पर नहीं पड़ रहा है तो उन्होंने राजाओं को पकड़ा। उनके माध्यम से जनता पर प्रभाव पड़ा तब उन्हें सफलता मिली। 
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फाउंडेशन के सदस्यों ने सबसे पहले योग की अलग-अलग विधाओं का प्रदर्शन किया। व्यायाम, दंड के साथ योग, लाठी के साथ योग का प्रदर्शन कर छात्रों का दिल जीत लिया। इसके बाद मटके में गुलाब की पंखुडि़यों को रखकर योग की विधाओं के माध्यम से फोड़कर छात्रों की तालियां बटोरी।

इसके बाद फाउंडेशन के सदस्यों ने चुगले हंसा रे मोती, कहां से आया कहां जाओगे खबर करो अपने तन की आदि गीतों ने छात्रों को झूमने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम हाल भर जाने के बाद बाहर भी संस्थान के एलसीडी पर छात्र कार्यक्रम देख रहे थे। सदगुरू और कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे बीएचयू कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने महामना मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण करके कार्यक्रम की शुरुआत की। 

सदगुरू ने छात्रों संग अलय-अलय पर किया डांस

छात्रों से संवाद कर उनकी जिज्ञासाओं को किया शांत - फोटो : अमर उजाला
 सद्गुरू ने छात्रों के डिमांड पर उनके साथ कार्यक्रम के बाद अलय अलय पर डांस किया। इस दौरान पूरे छात्र जोश में आ गए। कई छात्र उनके पास जाने लगे तो प्राक्टोरियल बोर्ड के सदस्यों ने सुरक्षा घेरा बनाकर सद्गुरू को भीड़ से बाहर निकाला। 

दिया संदेश-खुद का निर्माण करो
सदगुरु ने बीएचयू के छात्रों को संदेश दिया कि खुद का निर्माण करो और आगे बढ़ो। अपना निर्माण करोगे तो समाज का निर्माण होगा। समाज का निर्माण होगा तो देश का निर्माण होगा। देश का निर्माण होगा तो विश्व का निर्माण होगा। इसलिए खुद का निर्माण करो। 

बीएचयू पहुंचने से पहले सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने अपनी एक तस्वीर के साथ फोटो ट्विटर पर पोस्ट किया। इसमें उन्होंने मणिकर्णिका महाश्मासान को काशी का दिल बताया। इशके साथ ही उन्होंने लिखा कि यह पूर्व घोषित है कि जन्म और मौत निश्चित है। 

 

उत्तरदायित्व क्या है?

आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव - फोटो : अमर उजाला
सद्गुरु ने छात्रों के उत्तरदायित्व और रोजगार के सवाल पर कहा कि किसी भी चीज का उत्तरदायित्व आपके उत्तर एवं योग्यता पर निर्भर करता है। आपका उत्तर आपकी योग्यता से पहचाना जाता है। पुरुष प्रभुत्व पर उन्होंने कहा कि यह परंपरा पुराने समय से चली आ रही है, जहां पर पुरुष अपने शारीरिक बल से महिलाओं पर अपना प्रभुत्व स्थापित करते थे और यही मानसिकता आज भी देखने को मिलती है। सामाजिक दबाव पर कहा कि आज के समय में हमें अगर कुछ मिलता है तो उसके बदले में हमें एक लागत चुकता करनी पड़ती है, और इसी के कारण वर्तमान समय में हम आज सामाजिक दबाव से गुजर रहें हैं। यह स्वाभाविक है। किसी का कष्ट या दु:ख उसकी अपनी व्यक्तिगत समस्या है और इस समस्या को सार्वजनिक बनाना महज एक बेवकूफी है। 

सवाल पूछने वाले बीएचयू के छात्र 
सदगुरु से सवाल करने वालों में राजनीति विज्ञान तृतीय वर्ष की आयुषी और रिसर्च स्कालर सुशांत रहे। इनके अलावा सदगुरू के साथ पैनल में विधि संकाय से सारांश चतुर्वेदी, चिकित्सा विज्ञान संस्थान से अदिति उपाध्याय और सामाजिक विज्ञान संकाय से प्रियांशु सिंह रहे। कार्यक्रम के दौरान छात्रों को एक वीडियो दिखाया गया जिसमें छात्र अपने टीचर से सवाल पर सवाल पूछते हैं। परेशान टीचर आखिरकार झल्लाकर बोलता है कि मुझसे सवाल न करो बल्कि सदगुरुसे पूछो। इस वीडियो के खत्म होने पर छात्रों ने खूब तालियां बजाई। सदगुरु ने सोशल मीडिया के बारे में कहा कि समाज को यह समझना चाहिए कि क्या गलत है और क्या सही? और किसी भी प्रकार की चीजों पर आंख मूंद कर भरोसा नहीं करना चाहिए। 

परमानंद के बारे में बताया

आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव - फोटो : अमर उजाला
सदगुरू ने बताया कि मैसूर की चामुंडी पहाडि़यों पर चढ़े और एक चट्टान पर बैठ गए। उन्हें शरीर से परे का अनुभव हुआ। उन्हें लगा कि अपने शरीर में नहीं है बल्कि हर जगह फैल गए हैं। यह अनुभव कई बार हुआ। हर बार यह उन्हें परमानंद की स्थिति में छोड़ जाता। इस घटना ने उनकी जीवन शैली बदल दी। 

कहानी सुनाई
सदगुरु ने मैंगोे मेडिटेशन को निष्फल बताते हुए उन्होंने कहा कि आम का पौधा लगाने की बात सोच लेने से फल नहीं मिलता। आम का पौधा लगाकर सींचने से ही समय आने पर फल मिलेगा। गड्ढा खोदने वाले और पाटने वाले की कहानी सुनाकर छात्रों का दिल जीत लिया।

उन्होंने बताया कि एक आदमी सड़क किनारे गड्ढा खोद रहा था, पीछे दूसरा व्यक्ति उस गड्ढे को पाट रहा था। इन दोनों से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि वे अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। इन दोनों के काम के बीच तीसरा व्यक्ति पौधा लगाने वाले गुम था। 
 
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एक दिन में 8.52 लाख पौधे लगाकर बनाया विश्व रिकार्ड 

बीएचयू कुलपति संग आध्यात्मिक गुरु जग्गी वासुदेव - फोटो : अमर उजाला

ग्रीन हैंड्स परियोजना के तहत 16 करोड़ पौधे पूरे तमिलनाडु में लगाने का लक्ष्य रखा है। संगठन ने 17 अक्तूबर 2006 को तमिलनाडु के 27 जिलों में 8.52 लाख पौधे एक दिन में लगाकर गिनीज विश्व रिकार्ड बनाया है। रैली फार रिवर नदियों के संरक्षण के लिए अभियान चला रहे हैं। 2008 में इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार दिया गया। 2017 में अध्यात्म के लिए पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
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