बीएचयू स्वतंत्रता भवन में रविवार को आयोजित ‘तालीम-ओ-तरबियत’ कांफ्रेंस में मुसलमानों से विज्ञान और तकनीकी संग आगे बढ़ने का आह्वान किया गया। मुस्लिम युवाओं, महिलाओं और बीएचयू के विद्यार्थियों से खचाखच भरे हाल में संदेश दिया गया कि हिंदू-मुस्लिम समरसता संग हम तालीम के रास्ते तरक्की हासिल कर सकते हैं।
मौलाना आजाद उर्दू यूनिवर्सिटी के चांसलर जफर सरेशवाला ने कहा कि तालीम के बगैर कोई कौम तरक्की नहीं कर सकती। खासकर मुसलमानों के लिए तालीम और तरबियत दोनों सबसे जरूरी है। बस इसे पाने के लिए इरादा बुलंद करना होगा।
भारतीय मूल के अमेरिकी उद्यमी फ्रैंक इस्लाम ने कहा, मुसलमानों को शिक्षा के जरिए ही सशक्त किया जा सकता है। उच्च शिक्षा में भी भागीदारी जरूरी है। मुस्लिम महिलाओं को शिक्षित कर आगे बढ़ाने की जरूरत है, इससे ही कौम मजबूत होगी।
कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता तभी कायम रह सकती है, जब शिक्षा और ज्ञान की ताकत यहां हो। तालीम की ताकत के मायने तभी हैं, जब इसे एकदूसरे से साझा किया जाए। इसके लिए एकदूसरे के नजदीक आना होगा। उन्होंने जफर सरेशवाला को भरोसा दिलाया कि वो दुनिया भर में तालीम की जिस ताकत के लिए लड़ रहे हैं, उसमें बीएचयू का पूरा सहयोग रहेगा।
लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हुसैन ने कहा कि भारतीय सेना ही इकलौती जगत है, जहां जाति वर्ग के नाम पर कोई आरक्षण नहीं। बस खुद को उस काबिल बनाइए। सेना के कुछ किस्से सुनाकर हिंदू मुस्लिम की नजीर पेश की।
संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने कहा कि सच्ची ताकत तालीम और तरबियत में ही है। छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सलीम अशरफी ने कहा कि आज मुसलमान अपनी कमियों की वजह से पीछे है। आगे बढ़ने के लिए तालीम हासिल करने का जज्बा पैदा करना होगा।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर सैयद अहमद अली ने युवाओं को तालीम से जुड़ी भारत सरकार की योजनाओं से रूबरू कराया। बीएसई के एमडी आशीष चौहान ने कहा, आपके साथ भेदभाव हो रहा है, ये कहकर रोते मत रहिए। शिक्षा की डोर पकड़कर आगे बढ़िए।