वाराणसी। काशी में अपने पितरों का तर्पण करने रोजाना 50 हजार श्रद्धालु काशी पहुंच रहे हैं। सात दिनों में तीन लाख से अधिक लोगों ने अपने पूर्वजों का तर्पण किया हैं। देश विदेश से आने वाले लोगों की गंगा घाट और पिशाचमोचन कुंड पहुंच रहे हैं। अमेरिका के मिशिगन प्रांत के निवासी जैक्सन अपने दिवंगत चाचा नेट की आत्मा की शांति और मुक्ति की कामना लिए विशेष रूप से काशी पहुंचे, जहां उन्होंने वैदिक रीति-रिवाज से अस्थि विसर्जन एवं पिंडदान का धार्मिक अनुष्ठान किया।
जैक्सन के अनुसार, उनके चाचा भारतीय संस्कृति और काशी की मोक्ष-परंपरा के प्रति गहरी श्रद्धा रखते थे और उनकी अंतिम इच्छा थी कि उनकी अस्थियों को मोक्षदायिनी गंगा में विसर्जित किया जाए। चाचा की इसी अंतिम इच्छा का मान रखते हुए जैक्सन सात समंदर पार कर बनारस पहुंचे। अस्सी घाट पर तीर्थ पुरोहित राहुल पांडेय के आचार्यत्व में शास्त्रोक्त विधि-विधान, संकल्प और मंत्रोच्चार के साथ यह संपूर्ण संस्कार कराया गया। गंगा की अविरल धारा के बीच जब पुरोहितों के वैदिक मंत्र गूंज रहे थे, तब अस्थियां विसर्जित करते समय जैक्सन भाव-विभोर हो उठे। तीर्थ पुरोहित राहुल पांडेय ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काशी के पावन तट पर अस्थि विसर्जन और पिंडदान करने से जीवात्मा को भवबंधन से मुक्ति मिलती है और पितरों को परम शांति प्राप्त होती है।