बीएचयू के उर्दू विभाग की ओर से बुधवार को पंडित ब्रजनारायण चकबस्त: हयात और कारनामे विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई। प्रेमचंद सभागार में कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसा वातावरण बनाना जरूरी है जहां विद्यार्थी और शिक्षक खुलकर संवाद कर सकें। ज्ञान किसी एक भाषा या क्षेत्र तक सीमित नहीं होता बल्कि वह हर ओर है। विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे भाषा और साहित्य को संरक्षित और विकसित करें।
उन्होंने कहा कि उर्दू विभाग पंडित मदन मोहन मालवीय की दूरदृष्टि का परिणाम है। उर्दू भाषा और साहित्य से प्रेम करने वाले सभी लोगों को यहां आने के लिए प्रेरित करने को कहा। मुख्य अतिथि जम्मू विश्वविद्यालय के प्रो. शोहाब इनायत मलिक ने कहा कि उर्दू विभाग की सक्रियता इसे उत्तर प्रदेश के अग्रणी विभागों में स्थान दिलाती है। विभागाध्यक्ष प्रो. आफताब अहमद ने चकबस्त के जीवन, साहित्यिक योगदान और स्वतंत्रता आंदोलन से उनके संबंधों पर चर्चा की।
विभाग के 100 पुरा छात्रों ने अदबी कहकशां आयोजित किया। इस दौरान उर्दू विभाग की ओर से प्रकाशित शोध पत्रिका के विशेषांक का लोकार्पण भी किया गया। यह यूजीसी-केयर सूची में शामिल एक प्रतिष्ठित प्रकाशन है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रो. अली अहमद फातमी मुख्य वक्ता के तौर पर लोगों को संबोधित किया। पंडित ब्रजनारायण चकबस्त ने नज्म, गजल, मर्सिया और गद्य लेखन के माध्यम से साहित्य को समृद्ध किया। उनका जन्म 1882 में हुआ और मात्र 44 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।