कैंटोंमेंट स्थित बिशप हाउस परिसर में धर्मगुरुओं और रोजेदारों ने एक ही दस्तरख़ान पर रोज़ा इफ्तार किया। इसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई समेत सभी धर्मों के लोग मौजूद रहे। सभी ने काशी की गंगा-जमुनी तहजीब की इस परंपरा को देखते हुए रमजान के पाक महीने में अल्लाह से मिल्लत और सलामती की दुआएं मांगी।
मेज़बान धर्माचार्य यूजीन जोसेफ ने कहा कि भारत मिली-जुली तहजीब का मुल्क है, जहाँ सभी धर्मावलंबी आपस में प्रेम, मोहब्बत और भाईचारे के साथ रहते हैं। हमें अपनी इस संस्कृति को बचाए रखना है। यही वसुधैव कुटुंबकम् की परंपरा हमें पूरी दुनिया में अलग पहचान देती है। यहां के व्रत और त्योहार सबको समाहित करने की अपनी संस्कृति के कारण सदैव एकता का संदेश देते रहे हैं। इस आयोजन का उद्देश्य भी परस्पर सामाजिक सद्भावना को बनाए रखना है।
नमाज़ मौलाना अब्दुल आखिर नोमानी ने अदा कराई। उन्होंने मुल्क हिन्दुस्तान में अमन, मिल्लत और सौहार्द की दुआएं मांगी। स्वागत फादर फिलिप डेनिस ने किया और धन्यवाद फादर थॉमस मैथ्यू ने किया। इस मौके पर डॉ. मोहम्मद आरिफ, एके लारी, डॉ. शाहीना तहरीन, पार्षद वकास अंसारी, नुरुल हसन खां, अशफाक सिद्दीकी, गुरुद्वारा बड़ी संगत नीचीबाग के ग्रंथी भाई धर्मवीर सिंह, ज़ुबैर आदिल, मौलाना आखिर नोमानी, पत्रकार अमन, इम्तियाज अहमद, मेंहदी बख़्त, मुनीजा रफीक, सरदार मोइनुद्दीन अंसारी, फिरोज़ खान मुन्ना, मोहम्मद शाहिद, उमेश कबीर, भावना लूथरा, एहसान हसन, फसाहत हुसैन बाबू समेत अन्य मौजूद रहे।