प्रो. इश्तियाक अहमद
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पाकिस्तानी मूल के लेखक और स्वीडिश राजनीति शास्त्री प्रो. इश्तियाक अहमद ने कहा कि लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता की बुनियाद पर खड़ा भारत दुनिया के लिए आदर्श है। महात्मा गांधी ने मजहब का इस्तेमाल हिंदू-मुसलमान को करीब लाने के लिए किया, लेकिन जिन्ना ने मजहब का इस्तेमाल उन्हें अलग करने के लिए किया। जिन्ना का प्रयास नकारात्मक था। गांधी के मजहब का इस्तेमाल उच्च मूल्यों पर आधारित थे। हिंदुस्तान से बदले की आग में पाकिस्तान ने खुद को बर्बाद कर लिया है।
बीएचयू के कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए प्रो इश्तियाक ने बुधवार को अमर उजाला संवाददाता से विशेष बात की और कहा कि लोग कहेंगे कि जिन्ना ने मुसलमानों को एक किया, लेकिन ऐसा नहीं है। उन्होंने मुसलमानों को भी एक नहीं रखा। विभाजन के दौरान एक तिहाई मुसलमान भारत में छोड़ गए।
मोहम्मद अली जिन्ना का देश पाकिस्तान अब बर्बादी के मुहाने पर खड़ा है। वहां रोजगार नहीं है। न उद्योग और न ही कृषि। भारत से बदले की आग में उसने न तो शिक्षा पर ध्यान दिया और न ही आम नागरिकों के अधिकारों पर। भारत के साथ रिश्ते सुधारने और लाइन आफ कंट्रोल को अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर बनाने से ही पाकिस्तान के हालत सुधरेंगे।