इंटरनेट की दुनिया में किसी पर भी विश्वास न करें। साइबर ठगी के पीछे सबसे बड़ा कारण लोगों का लालच, अत्यधिक भरोसा और डर भी है। अपराधी निवेश को दोगुना, तीन गुना करने का लालच का जाल फेंकते हैं और भरोसा करते ही लोगों के साथ ठगी हो जाती है। बिना सोचे, समझे इन जालसाजों पर विश्वास कर बैठते हैं। तकनीकी जानकारी की कमी और सतर्कता का अभाव भी लोगों को साइबर अपराधियों का शिकार बनाता है।
यह बातें अमर उजाला संवाद में बुधवार को डीसीपी क्राइम सरवणन टी. ने कहीं। अमर उजाला के चांदपुर कार्यालय में साइबर अपराध और बचाव के बारे में आईपीएस सरवणन टी. ने व्यापारियों, छात्रों और अन्य लोगों के सवालों के सटीक जवाब दिए। कहा कि गोल्डन ऑवर्स 24 घंटे से पहले पीड़ित शिकायत करते हैं तो उनकी रकम बरामदगी शत प्रतिशत होती है। देश में डिजिटल अरेस्ट जैसा कानून नहीं है। यह लोगों को समझना चाहिए कि पुलिस कभी बताकर या फोन कर किसी को गिरफ्तार नहीं करती है।
साइबर अपराधियों के हथकंडे हैं। वह वर्दी में या फिर एआई वीडियो से डराते हैं। अनजान नंबर के वीडियो कॉल न उठाए। सोशल साइट्स पर प्राइवेसी बनाकर रखें। अनधिकृत मोबाइल एप डाउनलोड न करें, इससे भी धोखा हो रहा है। साइबर अपराधी उन्हीं को टारगेट करते हैं, जिनका वित्तीय लेनदेन अधिक होता है। शेयर ट्रेडिंग करने वाले भी साइबर अपराधियों के जाल में फंस जा रहे हैं।
सवाल- साइबर अपराधियों के पास कैसे हमारा डेटा पहुंच जाता है? मनीष मूंदड़ा, प्रवक्ता कैट
जवाब- डीसीपी ने बताया कि हमारी खुद की जानकारी सोशल मीडिया पर है। मोबाइल नंबर से अपराधी बैंक खाते तक पहुंच जाते हैं। घर बैठे पार्ट टाइम जॉब के चक्कर में अपनी पर्सनल जानकारियां दे देते हैं। मोबाइल और आधार नंबर किसी से साझा न करें।
सवाल- साइबर धोखाधड़ी के पीड़ितों को कैसे और कब शिकायत करनी चाहिए? श्याम सुंदर गुप्ता, जिलाध्यक्ष, कैट
जवाब- डीसीपी ने बताया कि जैसे सड़क हादसे में घायल को बचाने के लिए ऑवर्स होते हैं, ठीक उसी तरह साइबर धोखाधड़ी के शिकार पीड़ितों को गोल्डन ऑवर्स 24 घंटे के अंदर 1930 नंबर या
https://cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज की जा सकती है।
सवाल- साइबर अपराधी क्या पकड़े जाते हैं और रकम बरामद होती है? पंकज कुमार, व्यापारी, पांडेयपुर
जवाब- डीसीपी ने बताया कि साइबर अपराध में कुछ छिपता नहीं है। आरोपी गिरफ्तार किए जाते हैं और पीड़ितों की रकम भी बरामद होती है। गोल्डन ऑवर्स में शिकायत होती है तो खाते को होल्ड करा दिया जाता है। बाद में पैसा बरामद होता है। चार दिन बाद शिकायत होती है तो रिकवरी की प्रक्रिया लंबी हो जाती है। साइबर अपराधी एपीए बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं। एक खाते से रकम पांच मिनट के अंदर दो हजार खातों में पहुंच जाती है।
सवाल- मोबाइल हाथ में होने के बावजूद कैसे फ्रॉड हो जाता है?- राजनंदिनी सोनी, छात्रा, मंडुवाडीह
जवाब- डीसीपी ने बताया कि किसी भी ग्रुप पर आए लिंक पर क्लिक न करें। लालच ही फंसाती है। पहले रुकिए, समझिए और फिर आगे का निर्णय लीजिए। जल्दबाजी में कुछ नहीं करना चाहिए।