Varanasi News: बीएचयू के वैज्ञानिकों की ओर से पाकिस्तान के साथ प्रकाशित रिसर्च पेपर में आईओई फंड के इस्तेमाल की भी जांच होगी। इसके लिए बीएचयू जांच समिति गठित करेगा। आईओई फंड से हुए शोध कार्यों की भी पड़ताल होगी।
बीएचयू के वैज्ञानिकों की ओर से पाकिस्तान और बांग्लादेश के शोधकर्ताओं के साथ प्रकाशित रिसर्च पेपर का मामला विश्वविद्यालय प्रशासन ने संज्ञान में लिया है। इसके साथ ही आईबी और एलआईयू समेत अन्य जांच एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। ऐसे सभी शोध कार्यों की जानकारी जुटाई जा रही है, जिनमें दुश्मन देशों के शोधकर्ताओं के साथ संयुक्त रूप से शोध प्रकाशित हुए हैं।
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विश्वविद्यालय प्रशासन सप्ताहभर के भीतर एकेडमिक सेक्शन की ओर से जांच समिति गठित करेगा। समिति पूरे मामले की विस्तृत जांच करेगी। साथ ही यह भी पड़ताल की जाएगी कि पाकिस्तान के साथ संयुक्त रूप से प्रकाशित शोध में बीएचयू की महत्वाकांक्षी योजना इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस (आईओई) का फंड इस्तेमाल हुआ है या नहीं। बृहस्पतिवार को पूरे दिन आईओई फंड से हुए शोध कार्यों का ब्योरा खंगाला गया। इस संबंध में विश्वविद्यालय से भी आवश्यक सूचनाएं जुटाई जा रही हैं।
बीएचयू की जांच समिति इस पहलू की भी जांच करेगी कि आखिर रिसर्च पेपर बार-बार रिट्रैक्ट क्यों हो रहे हैं, शोध की गुणवत्ता में कहां कमी रह जा रही है और ऐसी घटनाएं रुक क्यों नहीं पा रही हैं। इसके अलावा शोध कार्यों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग की भी समीक्षा की जाएगी।
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जर्नल से शोध पत्र हटाए जाने के मामलों की जांच के लिए पहले गठित समिति की रिपोर्ट भी जल्द आने की उम्मीद है। उधर, ऑर्थोपेडिक्स विभाग के एक शोध पत्र को लेकर भी शिकायत की गई है। संबंधित प्रोफेसर ने जर्नल के संपादक को शिकायत भेजी है। इस मामले की जांच भी जल्द पूरी होने की संभावना है।