नारी...जिसके कई रूप हैं, नारी जननी है, मार्गदर्शिका है, बेटी है, प्रेमिका है, पत्नी है और सबसे बढ़कर एक बहुत प्यारी दोस्त है। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर हम आपके सामने देश की उन होनहार बेटियों का जिक्र करेंगे जिन्होंने अपने माता पिता का नाम रौशन किया है।
शिक्षा में कर रहीं ऊंचा नाम
शहर की बेटियां शिक्षा के क्षेत्र में भी अपना नाम ऊचा कर रही है। पांडेयपुर निवासी अनामिका सिंह ऐसी ही बेटी है जिन्होंने अपनी शुरूआती शिक्षा काफी मुश्किलों से पुरी कि । कड़ी मेहनत व पढ़ाई की वजह से अनामिका ने नेशनल एंट्रेंस स्क्रीनिंग टेस्ट के जरिए राष्ट्रीय विज्ञान शिक्षा व अनुसंधान संस्थान भुवनेश्वर में अपनी जगह बनाई । इसके वो स्नातक अभिलेख परीक्षा उत्तीर्ण कर अमेरिका स्थित पर्ड्यू विश्वविद्याल में आगे की पढ़ाई कर रही है। उनकी छोटी बहन आईआईटी कानपुर से बीटेक की पढ़ाई कर रही है।
डाक्टरी हो या उच्च शिक्षा हर जगह है अव्वल
रवींद्रपुरी निवासी डॉ. प्रिती डाक्टरी हो या उच्च शिक्षा हर क्षेत्र में अव्वल है। स्कूली शिक्षा के साथ स्नातक शिक्षा उन्होंने बायोलॉजी से अच्छे नंबरों से पास कि , पर आर्थिक दिक्कतों की वजह से डॉक्टरी की पढ़ाई आगे नहीं कर सकी। परास्नातक में उन्होंने एमए इंग्लिश के प्रवेश परीक्षा में दूसरा स्थान प्राप्त किया।
पीएचडी प्रवेश परीक्षा में पांचवा स्थान प्राप्त करने वाली प्रीति जब अपना थीसिस पुरा कर रही थी तभी उनकी मां को कैंसर हो गया और जिस दिन थीसिस सबमिट करने गई तो मां का देहांत हो गया है। पढ़ाई की वजह से अंतिम वक्त में भी मां से नहीं मिल पाइ। मां का साथ छुटने के बाद भी अपनी नेट की परीक्षा उत्तीर्ण कर आज वो आर्य महिला पीजी कालेज में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर कार्यरत है।