बेटियों को गोद लेने वालों की संख्या भी बढ़ी : जिला प्रोबेशन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 27 बेटियों में 14 को देश के विभिन्न राज्यों के दंपतियों ने गोद लिया है। इनमें एक बच्ची को सिंगापुर के एनआरआई दंपती ने गोद लिया है। वहीं, शून्य से 10 वर्ष की उम्र की 13 बच्चियों को अब भी मां-बाप के प्यार और दुलार के साये का इंतजार है।
60 दिनों के बाद अनाथ घोषित की जाती हैं बेटियां : लहुराबीर स्थित राम कुमारी आश्रम के प्रभारी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि लावारिस हाल में बेटियां ही ज्यादा मिलती हैं। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के निर्देश पर बच्चे यहां लाए जाते हैं। इन बच्चों का पूरा मेडिकल टेस्ट कराने के बाद ही उन्हें भर्ती किया जाता है। मेडिकल के आधार पर उनकी पहचान के लिए विज्ञापन भी जारी किए जाते हैं। परिजनों को बच्चों को अपनाने के लिए 60 दिन का समय मिलता है।
शिवपुर थाना क्षेत्र के शुद्धिपुर में बीते 19 सितंबर को झाड़ियों में एक बच्ची रोती हुई मिली थी। पास से गुजर रही महिला ने उसे रोते हुए सुना तो पुलिस को सूचना दी। बच्ची को मिठाई के एक झोले में भरकर कोई छोड़ गया था। पुलिस ने बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया। उसे सीडब्ल्यूसी की मदद से लहुराबीर स्थित अनाथ आश्रम में भर्ती कराया। अब वह स्वस्थ है।
बड़ागांव थाना क्षेत्र के हरहुआ में 31 अगस्त को एक नवजात बच्ची रिंग रोड फेज-2 पर मां दुर्गा मंदिर के समीप झाड़ियों में मिली थी। बच्ची को रोते देख ग्रामीणों ने पुलिस को बुलाया। मेडिकल जांच में सामने आया कि बच्ची का जन्म करीब चार घंटे पहले ही हुआ था। बच्ची को बाद में काशी अनाथालय भेजा गया।
मिर्जामुराद के अमिनी गांव में नौ नवंबर 2025 को पोखरे किनारे एक नवजात बच्ची का शव मिला था। पुलिस और चिकित्सकों की जांच में सामने आया कि बच्ची को दो-तीन दिनों के भीतर बेरहमी से फेंका गया था। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या में प्राथमिकी दर्ज की थी।