परंपरा से जुड़कर ही आगे बढ़ेगी कथक की नई पीढ़ी
मिर्जापुर से जुड़ी कथक नृत्यांगना नम्रता श्रीमाली का संदेश है कि शास्त्रीय नृत्य को सीखने के लिए धैर्य और निरंतर अभ्यास जरूरी है। नई पीढ़ी में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन उसे सही दिशा, प्रशिक्षण और मंच मिलने की आवश्यकता है। कथक की प्रस्तुतियों में लय, ताल, भाव और अभिनय का संतुलन ही कलाकार को विशिष्ट बनाता है।
कहा कि युवाओं को कथक से जुड़ने के लिए सबसे पहले इसे सीखने की इच्छा और धैर्य विकसित करना चाहिए। यह कला एक दिन में नहीं सीखी जा सकती। इसके लिए नियमित अभ्यास, गुरु का मार्गदर्शन और अपनी गलतियों को सुधारने की जरूरत होती है। आज युवाओं के पास अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए कई मंच हैं। उन्हें इन अवसरों का उपयोग भारतीय शास्त्रीय नृत्य को लोकप्रिय बनाने में करना चाहिए। कथक की परंपरा को समझकर जब युवा इसे अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बनाएंगे, तभी यह कला आने वाली पीढ़ियों तक मजबूती से पहुंच सकेगी।
कथक साधना से युवा पीढ़ी को जोड़ना जरूरी
कथक कलाकार आशीष सिंह ‘नृत्य मंजरी दास’ ने बताया कि कथक केवल नृत्य की एक विधा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, भक्ति और परंपरा को अभिव्यक्त करने का माध्यम है। आज की युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने और उससे जुड़ने की जरूरत है। इसके लिए बच्चों को बचपन से ही संगीत और नृत्य की शिक्षा देने के साथ उचित प्रशिक्षण और मंच उपलब्ध कराना चाहिए। नियमित रियाज, गुरु के प्रति समर्पण और कला के प्रति ईमानदारी ही एक कलाकार को विशिष्ट बनाती है। युवाओं को कथक की पारंपरिक शैली सीखते हुए इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लेना चाहिए।
सरला नारायण सिंह और वसुंधरा शर्मा।
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35 वर्षों से कथक साधना में जुटी हैं संगीता सिन्हा
कथक नृत्यांगना संगीता सिन्हा पिछले 35 वर्षों से वाराणसी में इस कला की सेवा कर रही हैं। पद्म विभूषण पंडित बिरजू महाराज की शिष्या के रूप में उन्होंने काशी की युवा पीढ़ी को उनकी कथक शैली और नृत्य की बारीकियों से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके प्रयासों से यहां कई बार पंडित बिरजू महाराज की कथक कार्यशालाओं का आयोजन हुआ, जिसमें विद्यार्थियों को सीधे उनसे सीखने का अवसर मिला।
संगीता सिन्हा ने बताया कि कथक सीखने वाले युवाओं को सबसे पहले इसकी परंपरा, व्याकरण और भाव पक्ष को समझना चाहिए। केवल मंच पर अच्छा दिखना ही कला की संपूर्णता नहीं है, बल्कि उसके पीछे वर्षों की साधना और अनुशासन होता है। पंडित बिरजू महाराज जी से मिली सीख ने मुझे हमेशा इस कला को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की प्रेरणा दी। युवाओं को नियमित रियाज करना चाहिए, गुरुजनों का सम्मान करना चाहिए और अपनी प्रस्तुतियों में कथक की मौलिकता बनाए रखनी चाहिए। सोशल मीडिया और आधुनिक मंचों का उपयोग कला के प्रचार के लिए करें, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़े रहना न भूलें।
भाव और अभिव्यक्ति से जीवंत होता है कथक
कथक नृत्यांगना वसुंधरा शर्मा का संदेश है कि इस विधा की खूबसूरती केवल पैरों की गति और चक्करों में नहीं, बल्कि भावों की अभिव्यक्ति में भी है। कलाकार को संगीत, साहित्य और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं की समझ विकसित करनी चाहिए, ताकि उसकी प्रस्तुति दर्शकों से सीधे संवाद कर सके।
कहा कि कथक में लय और ताल जितने महत्वपूर्ण हैं, उतने ही महत्वपूर्ण भाव और अभिनय भी हैं। जब कलाकार किसी रचना के भाव को समझकर प्रस्तुत करता है, तभी दर्शक उससे जुड़ पाते हैं। युवाओं को चाहिए कि वे तकनीकी अभ्यास के साथ संगीत, साहित्य और हमारी सांस्कृतिक विरासत को भी जानें। किसी दूसरे कलाकार की नकल करने के बजाय अपनी सीख और संवेदना के आधार पर अपनी पहचान बनाएं। अच्छे गुरु का मार्गदर्शन और मंच पर प्रस्तुति का अनुभव कलाकार को परिपक्व बनाता है। कथक के प्रति ईमानदारी और निरंतर सीखने की ललक ही सफलता का रास्ता है।
वरिष्ठ कथक कलाकार संगीता सिन्हा और उर्वशी श्रीवास्तव।
- फोटो : संवाद
अनुशासन और निरंतर अभ्यास से मिलेगी पहचान
कथक नृत्यांगना उर्वशी श्रीवास्तव का संदेश है कि कला के क्षेत्र में पहचान बनाने के लिए धैर्य, मेहनत और निरंतरता जरूरी है। शुरुआती दौर में अवसर कम मिलें, तब भी युवाओं को अभ्यास जारी रखना चाहिए। मंच पर मिलने वाली सफलता के पीछे लंबे समय की तैयारी और समर्पण होता है।
उर्वशी ने बताया कि युवा कलाकारों को अपनी कला पर भरोसा रखना चाहिए और शुरुआती कठिनाइयों से घबराना नहीं चाहिए। हर प्रस्तुति कुछ नया सिखाती है। नियमित रियाज, समय का अनुशासन और गुरु के निर्देशों का पालन कलाकार को आगे बढ़ने में मदद करता है। साथ ही, कलाकारों को एक-दूसरे की प्रस्तुतियां देखनी चाहिए और उनसे सीखने की कोशिश करनी चाहिए। कथक हमारी सांस्कृतिक धरोहर है, इसलिए इसे सीखना और आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है। नई पीढ़ी यदि समर्पण और मेहनत के साथ इस परंपरा को अपनाए, तो काशी की कथक शैली देश-दुनिया में और अधिक पहचान हासिल कर सकती है।