वाराणसी में लॉकडाउन में एक ओर जहां काम बंद है तो वहीं पावर कारपोरेशन के फरमान ने उद्यमियों को झटका दे दिया है। मार्च माह के बिल अप्रैल माह में जमा करने और पिछलेे तीन माह के औसत के आधार पर जमा करने के आदेश ने उद्यमियों व कारोबारियों की नींद उड़ा दी है। मार्च पखवारे से कामधाम बंद होने और फैक्ट्रियों में माल पड़े होने के बावजूद श्रमिकों को वेतन का भुगतान करने वाले उद्यमियों का कहना है कि यह पावर कारपोरेशन का तुगलगी फरमान है। इस संबंध में उद्यमियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मेल और ट्वीट करके अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए राहत की गुहार लगाई है।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व प्रमुख उद्यमी आरके चौधरी ने कहा कि कोरोना वायरस के प्रकोप से डेढ़ माह पूर्व ही उद्योग बंद हो गए। श्रमिकों को घर से सैलरी दी जा रही है। पूर्व में दिए गए माल की अब तक पेमेंट नहीं आई। इस संकट की घड़ी में मार्च महीने की बिजली लेना तर्क संगत इसलिए नहीं है कि जिस बिजली का इस्तेमाल ही नहीं किया उसका चार्ज क्यों दें। पूर्वांचल भर के कारोबारी इस आदेश का पुरजोर विरोध करेंगे।
वाराणसी टूरिज्म वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल मेहता ने कहा कि जनवरी के बाद ही कोरोना के चलते होटल उद्योग बैठ गया है। आने वाले जुलाई माह तक राहत की उम्मीद नहीं है। सिर्फ बनारस के होटल उद्योग से जुड़े कारोबारियों को करोड़ों रुपये की क्षति पहुंची है। ऐसे में पावर कारपोरेशन का यह आदेश तर्कसंगत नहीं है। आईआइए के उद्यमियों ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाते हुए आदेश को वापस लेने की मांग की है।