जल परिवहन के जरिये उद्यमियों का माल प्रयागराज से बनारस, गाजीपुर, पटना होते हुए कोलकाता और हल्दिया तक पहुंच सकेगा। यही नहीं, बांग्लादेश तक भी माल भेजे जाने की व्यवस्था जल परिवहन के जरिये होगी। यूपीसीडा की पहल पर ही गंगा में बड़े-बड़े जलपोत चलेंगे।
छोटे शहरों के लिए छोटे क्षमतानुसार जलपोत और वाराणसी-हल्दिया जलमार्ग-एक के बीच भारी जलपोत चलाए जाने की तैयारी है। यूपीसीडा कइस योजना को उत्तर प्रदेश सरकार ने भी मंजूरी दे दी है। जल्द ही बड़े जलपोत प्रयागराज, कानपुर और वाराणसी को मिलेंगे। जल्द ही रूटों का निर्धारण किया जाएगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को लेकर प्रदेश सरकार का अधिक जोर है।
औद्योगिक पार्क में कलस्टर के तहत उद्योग इकाइयां विकसित होंगी। फूड, आयरन, कृषि यंत्र, प्लाईवुड, पॉलीबैग, पैकेजिंग समेत अलग कलस्टर में इकाइयां लगेगी। इसके साथ ही एकीकृत व्यवस्था भी उद्यमियों को मिलेगी। बिजली, फायर, प्रदूषण, बैंक और टैक्स संबंधी व्यवस्थाओं के लिए सिंगल विंडो सिस्टम होगा। यूपीसीडा अधिकारियों के अनुसार, बनारस-प्रयागराज को नोएडा एनसीआर की तर्ज पर विकसित करने की तैयारी है। ईस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर जैसी व्यवस्था यहां होगी।
यूपीसीडा अधिकारियों ने बताया कि बनारस और प्रयागराज की कनेक्टिविटी अन्य शहरों से आसान व सुलभ है। बनारस से चंदौली, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल तक और प्रयागराज से कानपुर, आगरा, नई दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान तक आवाजाही कर सकते हैं। वर्तमान में छह एक्सप्रेसवे से बनारस-प्रयागराज का जुड़ाव है। इसके साथ ही दोनों शहरों के लिए रेलवे, जलपरिवहन और एयरपोर्ट भी सुविधा है।
प्रदेश में दस एयरपोर्ट बनाने की दिशा में काम चल रहा है, जिसका 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इसमें पांच शुरू भी होने वाले हैं। बहुत जल्द ही प्रदेश में 21 घरेलू और पांच इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने वाला उत्तर प्रदेश पहला राज्य होगा।
काशी और प्रयागराज के बीच इंडस्ट्रियल पार्क बनाए जाने को लेकर कागजी कार्रवाई पूरी हो चुकी है। करीब 1400 एकड़ में पार्क बनाया जाना है। जलपरिवहन के जरिये उद्यमियों के माल ढुलाई पर जोर दिए जाने को लेकर बड़े-बड़े जलपोत भी गंगा में चलेंगे।- प्रेमप्रकाश मीणा, अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी, यूपीसीडा