बजट से उम्मीद लगाए बैठे पूर्वांचल के सूक्ष्म, लघु-मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) के हिस्से में राहत कम, कसक ज्यादा आया। एमएसएमई से जुड़े उद्यमी मानते हैं कि बजट में पूर्वांचल के लिए विशेष पैकेज का एलान होना चाहिए था। लेकिन, ऐसा कोई प्रावधान नहीं किया गया जो पूर्वांचल के औद्योगिक विकास पर केंद्रित हो। हालांकि उनका यह भी मानना है कि जिस तरह वित्तमंत्री ने एमएसएमई के महत्व को स्वीकार किया। साथ ही, आधारभूत सुविधाओं के लिए चार लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया। उससे उम्मीद है कि आने वाले समय में बुनियादी ढांचा बेहतर होगा।
एमएसएमई की 50 करोड़ से नीचे टर्नओवर वाली कंपनियों को टैक्स में पांच फीसदी छूट से भी राहत होगी लेकिन पूर्वांचल के औद्योगिक विकास के लिए जरूरी था कि यहां के लिए कोई बड़ा एलान होता। कैंटोनमेंट स्थित एक होटल में रामनगर औद्योगिक एसोसिएशन की देव भट्टाचार्या की अध्यक्षता में हुई बैठक में ईंट निर्माता परिषद और वाराणसी व्यापार मंडल के पदाधिकारी भी शामिल हुए। उनका कहना था कि वाराणसी या पूर्वांचल में उम्मीद थी कि किसी बड़े उद्योग की स्थापना की घोषणा होगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। एक्साइज ड्यूटी, श्रम कानूनों में रियायतों की आस भी पूरी नहीं हुई। पांच लाख तक की आय को करमुक्त किया जाना चाहिए था। इस दौरान व्यापारी नेता अजीत सिंह बग्गा, प्रमोद अग्रहरि, ईंट निर्माता समिति से कमलाकांत पांडेय, प्रशांत गुप्ता, अमित घोसला, अमित गुप्ता आदि मौजूद थे।