वर्षों के संघर्ष के बाद भी भारतीय संस्कृति भारत की परिवार व्यवस्था के कारण सुरक्षित है। राष्ट्र के प्रति श्रद्धा और दायित्व का भाव भी सर्वप्रथम परिवार रूपी पाठशाला में सिखाया जाता है।
ये बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कुटुंब प्रबोधन संयोजक रविंद्र जोशी ने मुमुक्षु भवन में कहीं। पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के कुटुंब प्रबोधन की बैठक में उन्होंने उच्चतम न्यायालय के कुछ निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि बिना विवाह के साथ रहने का निर्णय भारतीय पारिवारिक व्यवस्था को छिन्न-भिन्न करता है।
उन्होंने कुटुंब व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आठ गुणों को आवश्यक बताया। ये गुण बल, शील, ओज, धैर्य, युक्ति, बुद्धि, दृष्टि और दक्षता हैं। उन्होंने आरएसएस के शताब्दी वर्ष में चर्चा किए जा रहे पांच परिवर्तनों के बारे में बताया।
अध्यक्षता कैलाश मठ के महामंडलेश्वर स्वामी आशुतोषानंद गिरि ने की। उन्होंने कहा कि 1200 वर्ष पूर्व केरल के कलाड़ी गांव में जन्म लेने वाले बालक का मां अन्नपूर्णा के सामने नतमस्तक होना संपूर्ण भारत को एक परिवार के रूप में प्रतिबिंबित करता है। काशी प्रांत के प्रांत संघचालक अंगराज और अखिल भारतीय सह कुटुंब संयोजक मनसुख भाई सेठिया भी माैजूद रहे।
संचालन डॉ. अमरनाथ ने किया। अद्विका पाठक ने नृत्य प्रस्तुत किया। उद्घाटन सत्र में काशी प्रांत के सह प्रांत कार्यवाह राकेश, अवध प्रांत के कुटुंब संयोजक राजीव, गोरक्ष प्रांत के कुटुंब संयोजक संजय, काशी प्रांत मातृशक्ति आयाम की नीता, वेंकट रमन घनपाठी, हरीश वालिया, दयाशंकर आदि मौजूद रहे। संयोजन शुकदेव ने किया।