घटना का निरीक्षण कालिया साहब की छावनी वसूली घर से शुरू हुआ। उनका घर नंगु साव के बगल में था। अभियुक्तगण 30 गांवों से थे, उसका नक्शा भी आरोप पत्र के साथ दाखिल किया गया। अभियुक्तों के अधिवक्ता पं. उमाकांत पांडेय ने भी अभियुक्तों के बचाव में नक्शा दाखिल किया। विवेचना के बाद पुलिस ने 104 अभियुक्तों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
गिरफ्तार होते रहे अभियुक्त
मुकदमें के दौरान अभियुक्त गिरफ्तार होते रहे और उनकी संख्या बढ़ती रही। कुल 67 अभियुक्त के खिलाफ ट्रायल अदालत में हुआ। पुलिस ने विवेचना के बाद मुकदमा सुनवाई के लिए आरोप पत्र आरएल सिंह प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रेषित किया। मजिस्ट्रेट ने मामले में आरोपितों का मुकदमा 11 अक्तूबर 1943 को सेशन को सुनवाई के लिए प्रेषित कर दिया।
जब पुलिस ने आरोप पत्र अदालत में प्रेषित कर दिया तो मुकदमें के पहले चरण में सभी 67 आरोपितों के ऊपर अदालत ने आरोप निर्धारित किए। सभी ने अपने ऊपर लगाए गए आरोप से इंकार किया और विचारण की मांग की। पुलिस की गोलीबारी में घायल व्यक्ति भी मुल्जिम बन गए। थाने के भीतर प्रवेश करते समय थानाध्यक्ष अनवारुल हक के गोली से चार व्यक्ति घायल हुए थे और तीन व्यक्ति मर गए थे।
चार व्यक्तियों में विश्वनाथ कलवारगांव अनौती, सत्यनारायन सिंह गांव अमराए, राम सिंह गांव कवाई पहाड़पुर, सीता राम कोइरीगांव अहिरौरा थे। इन चारों के खिलाफ धारा 147 ताजिराते हिंद व 35 भारतीय रक्षा कानून के तहत आरोप निर्धारित हुए और विचारण हुआ।