बाड़े में तड़प रहे गोवंश
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स्थानीय लोगों की मानें तो चारा पानी के नाम पर उन्हें कुछ नहीं दिया जाता। रोज कुछ चरवाहे पहाड़ियों पर चराते हैं और आधा किलोमीटर दूर स्थित नदी से पानी पिलाकर फिर से उन्हें बाड़े में कैदकर देते हैं। ऐसे में अक्सर पशुओं की मौत हो जाती है। मृत पशुओं को नदी के किनारे फेंक दिया जाता है। बाड़े में खाने, पीने की कोई व्यवस्था नहीं है। पशुओं को दिन में एक बार पानी पिलाने के लिए नदी पर ले जाया जाता है। बाड़े में कोई सुविधा नहीं है। आसपास व यहां से गुजरने वाले लोगों ने बताया कि दो तीन दिन पहले भी यहां पांच-छह पशु मर गए थे।
ग्रामीणों के रहमों करम पर जीवित हैं बेजुबान
पशु बाड़े में बंद छुट्टा पशु ग्रामीणों के रहमो करम पर जी रहे हैं। पहली बार ऐसा मामला नहीं हुआ है। पांच जनवरी 2019 को बेलन नदी के मोहरा घाट पर 25 गोवंश मृत मिले थे। उस समय भी पूरा महकमा क्षेत्र में जांच के लिए पहुंचा था। छुट्टा पशुओं को हांककर नदी में कुदाने के चलते पशुओं के मौत की चर्चा रही।
हालांकि इस मामले में जांच की बात आई गई हो गई। उस दौरान अधिकारियों ने पशु बाड़े में बिजली, पानी की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया पर आज तक वहां कुछ नहीं हो पाया। हालत यह है कि ग्रामीण खाने पीने के लिए दे देते हैं तो उसी से पशुओं की सांस चलती रहती है।