वाराणसी (ब्यूरो)। साइबर ठगी करने वाले अब बच नहीं पाएंगे। रामनगर के विधि विज्ञान प्रयोगशाला में साइबर क्राइम फोरेसिंक लैब बनाया जाएगा। लैब के लिए कई उपकरण आ चुके हैं जबकि कुछ और को अभी खरीदने की तैयारी है।
साइबर क्राइम फोरेसिंक लैब खुलने से बनारस सहित पूर्वांचल के आठ से दस जिलों को इसका फायदा होगा। साथ ही यहां एक जुलाई से बिसरा का परीक्षण भी होगा।
अब तक स्थानीय पुलिस साइबर ठगी की पड़ताल के लिए लखनऊ या अन्य प्रदेश में स्थापित साइबर क्राइम फोरेंसिक लैब की मदद लेती थी। फोरेंसिक साइंस लैब के निदेशक डा. एसबी उपाध्याय गुरुवार को बनारस में थे। टीम के साथ रामनगर पहुंचे डा. उपाध्याय ने यहां साइबर क्राइम फोरेसिंक लैब स्थापित करने का निर्णय लिया।
उन्होंने विधि विज्ञान प्रयोगशाला का दौरा भी किया और यहां एक जुलाई से बिसरा परीक्षण शुरू करने की बात कही। लैब को आधुनिक बनाने के लिए नए उपकरण की व्यवस्था सुनिश्चित करने का आश्वासन भी दिया।
शुरुआत में चार जिलों बनारस, गाजीपुर, चंदौली और जौनपुर से आए बिसरा की जांच होगी। मालूम हो कि अकेले बनारस से 70 से 80 बिसरा हर महीने जांच के लिए लखनऊ भेजा जाता है। बहरहाल, डा. उपाध्याय ने पुलिस लाइन पहुंचकर वहां की फोरेंसिक लैब का जायजा लिया। साथ ही अधिकारियों से जरूरी उपकरणों की कमी को दूर करने के लिए प्रस्ताव बनाकर देने को कहा।