आचार्य नरेंद्रदेव ने काशी विद्यापीठ में ही समाजवाद की नर्सरी रोपी थी। आदर्श और विचारधारा के लिए लड़ना और उस विचारधारा को अपने ज्ञान और सोच से सींचकर आम जीवन में आजमाना यह किसी सामान्य व्यक्ति का काम नहीं है। काशी विद्यापीठ और बीएचयू के कुलपति पद को सुशोभित करने वाले आचार्य नरेंद्रदेव आम आदमी के लिए बेहद सहज और सरल थे।
वह योग्य शिक्षक ही नहीं, राजनीतिज्ञ, मेधावी छात्र, विचारक और व्याख्याता भी थे। काशी विद्यापीठ के प्रो. आरपी पांडेय ने बताया कि क्वींस कॉलेज से पुरातत्वशास्त्र की पढ़ाई के दौरान सच्चिदानंद सान्याल ने इनकी मुलाकात कई क्रांतिकारियों से करवाई। पढ़ाई करते हुए ही नरेंद्र देव भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ गए। लिहाजा लोकमान्य तिलक, आरसी दत्त व जस्टिस रानाडे जैसे क्रांतिकारियों के प्रभाव में रहे।