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देश के साथ ही काशी के वासी डूबे गणतंत्र दिवस के जश्न में, अलर्ट पर शहर, चप्पे-चप्पे की तलाशी

Sun, 26 Jan 2020 02:11 AM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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गंगापुर गांव में गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर सरसो के खेत में मस्ती करतीं युवतियां - फोटो : amar ujala
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ठंड की सितम भरी रात में आज देश के साथ ही काशी के वासी भी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे कि घड़ी की सूई जल्दी से बारह बजने का इशारा करे और वे अपने चहेतों को मोबाइल पर बधाई संदेश भेजकर और सोशल मीडिया पर अपनी खुशी व्यक्त करें।

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हुआ भी वही जैसे ही घड़ी ने बारह बजने का इशारा किया, आधी रात में भी खुली और अपलक झपकती निगाहें मोबाइल के साथ अन्य तरीकों से खुशी का इजहार कर रहीं थीं, गौरवान्वित महसूस कर रहीं थी कि विश्व के सबसे बड़े गणतंत्र का वासी होने पर

बताते चलें कि गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर शहर भर में पुलिस ने चेकिंग अभियान चलाया। एसएसपी प्रभाकर चौधरी के निर्देश पर गंगा घाटों, होटलों, गेस्ट हाउस, रोडवेज बस स्टेशन और रेलवे स्टेशन के आसपास इलाकों में सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। वहीं बाबतपुर एयरपोर्ट पर सीआईएसएफ जवानों ने परिसर में आने-जाने वालों की कई चक्र में चेकिंग की।
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बीएचयू परिसर में गणतंत्र दिवस पर तिरंगा बेचता दिव्यांग छात्र - फोटो : a

पहले गणतंत्र का ताजगी आज भी है दिलों में जिंदा

देश आज 71वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। पहले गणतंत्र दिवस पर जो भाव और अहसास था उसकी ताजगी आज भी दिलों में जिंदा है। हमारे पुरनिए उस दिन को याद करके फिर उन्हीं यादों में खो जाते हैं। कोई नए कपड़े पहनकर स्कूल पहुंचा था तो किसी के गांव भर में पूड़ी, मिठाई और खीर बनाकर जश्न मनाया गया। बच्चों द्वारा कतार में निकलकर गांव की गलियों में देशभक्ति का नारा लगाने का दृश्य तो भुलाए ही नहीं भूलता है।

स्कूल से कहा गया नया कपड़ा पहनकर आएं

87 वर्षीय बाबू नंदन सिंह कहते हैं कि जब पहली बार गणतंत्र दिवस मनाने की घोषणा हुई तो गांव में बड़े बुजुर्गों से इसके बारे में सुना। मास्टर जी इसे ऐतिहासिक दिन बता रहे थे। लड़कों को नया कपड़ा पहनकर विद्यालय आने के लिए कहा गया था। उस समय गांव और शहर के फर्क को आसानी से देखा और समझा जा सकता था। समय बीतने के बाद भारत की हर क्षेत्र में बढ़ती शक्ति देखकर संतोष होता है।
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असि घाट पर तिरंगा लेकर खुशी व्यक्त करती छात्रा - फोटो : a

पर्व आने से पहले ही शुरू हो जाती थीं तैयारियां

जिंदगी में नौ दशक से ज्यादा के समय पार कर चुके गिरजा शंकर बताते हैं कि पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा था। उस समय राष्ट्रीय पर्व आने के पहले ही तैयारियां शुरू हो जातीं। त्योहारों की तरह ही इस पर्व पर दो-तीन दिन पहले से मिठाईयां बनने लगतीं। नए कपड़े सिलाए जाते। बच्चों के नारे सुनने के लिए लोग घरों से बाहर निकल पड़ते थे। क्या किसान, क्या नौजवान बस सबके चेहरे से झलक जाता था कि आजादी और गणतंत्रता सबके लिए बेशकीमती हैं।

झंडा लेकर लगा रहे थे खेतों में दौड़

गुलाब प्रसाद तिवारी कहते हैं कि हम लोग खुशी में हाथों में झंडा लेकर खेतों में दौड़ लगा रहे थे, उस समय सभी बच्चों के पास झंडा भी नहीं था एक दूसरे से झंडा मांग कर लेकर भारत माता की जय के नारे भी लगा रहे थे। काफी उत्साह सा गांव में भी शाम को लोगों ने अपने घरों के सामने दीपक भी जलाए और मंदिरों में जगह-जगह दीपक जलाकर लोग भजन कीर्तन भी कर रहे थे। आज भी हमें याद है वह समय।

घरों में बनी थी पूड़ी, मिठाई और खीर

ओंकारनाथ उपाध्याय पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताते हैं कि गणतंत्र दिवस पर हम लोग उत्साह के साथ झंडे को लेकर भारत माता के नारे लगाते हुए गांव में घूमते थे। बड़े बुजुर्ग भी बच्चों को उत्साहित करते थे और हम लोग नारेबाजी करते हुए झंडा लेकर पूरे गांव में घूमते थे। आज भी उस दिन को याद कर मन में जोश भर जाता है। सभी लोगों ने पर्व की तरह मनाया घरों में पूड़ी, मिठाई और खीर बनी। एक दूसरे को बधाई दी और मंदिरों में पाठ पूजा भी हुआ ।
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