- महासमागम में विश्वगुरु बनने का हो गया बीजारोपण
- 51 शक्तिपीठ और द्वादश ज्योतिर्लिंग महासमागम का हुआ समापन
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के भैयाजी जोशी ने कहा कि कुंभ का एक चक्र 144 साल में पूरा होता है। एक चक्र 1857 से 2001 तक चला। 1857 की क्रांति भारत की स्वतंत्रता का आधार बनी। वर्ष 2001 में पुन: नया चक्र शुरू हुआ, तब सनातन के नवोन्मेष का बीज बोया गया। 2014 में वह अंकुरित हुआ और अब फूल-फल रहा है। महाकुंभ की पूर्व संध्या पर महादेव की नगरी में शक्तिपीठों और द्वादश ज्योतिर्लिंग के प्रतिनिधियों का महासमागम भी बीजारोपण है। इस कुंभ का चक्र जब 2145 में पूरा होगा तब यह बीज विश्वगुरु भारत के रूप में पूर्ण पुष्पित-पल्लवित हो चुका होगा।
वह रविवार को रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में सेंटर फॉर सनातन रिसर्च एवं ट्राइडेंट सेवा समिति ट्रस्ट की ओर से आयोजित दो दिवसीय 51 शक्तिपीठ और द्वादश ज्योतिर्लिंग महासमागम के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शक्ति और शिव का स्मरण हमें वह मानसिक शक्ति देता है जो धर्म की रक्षा के लिए अनिवार्य है। हमारा धर्म प्रकृति के पूजन का संदेश देता है उसके दोहन का नहीं। हमें समाज धर्म धारण करना होगा तभी हम सनातन का मंतव्य अगली पीढ़ियों तक पहुंचा पाएंगे।
उन्होंने संदेश दिया कि देश के मंदिरों को पर्यटन का केंद्र नहीं बनने देना है। यह प्रवृत्ति सनातन धर्म के संरक्षण और संवर्धन के लिए घातक है। पर्यटन केंद्र बनने का ही परिणाम है कि अब लोग मंदिर में दर्शन करने की बजाय उसको देखने जा रहे हैं। यह बदलाव चिंताजनक है। दर्शन के भाव से आने वाले तो सर्द रात में गंगा तट पर खुले में रात बिताते हैं। इसका प्रमाण पूरी दुनिया प्रयागराज के महाकुंभ में देखेगी।
हमारे तीर्थ पर्यटन नहीं तीर्थाटन के क्षेत्र
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने कहा कि 10 महीने से जो काशी आ रहा है, वह अयोध्या भी जा रहा है। जहां भी तीर्थ पर जाएं वहां से प्रेरणा लेकर आएं, कुछ सीखकर आएं। हम अपने तीर्थों को इस तरह से ढालेंगे तो परिणाम तीर्थाटन होगा। हमारे तीर्थ पर्यटन का नहीं तीर्थाटन के क्षेत्र हैं। तीर्थ का मतलब है अपने अंदर के संस्कारों को और विचारों को सकारात्मक बनाना है। तीर्थों में अंदर के संस्कारों में शुद्धता व पवित्रता का भाव जगता है। भारत की आत्मा तीर्थों में विकास करती है। तीर्थों का विकास भारत का विकास है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण अयोध्या है।
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अखंड भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं शक्तिपीठ
वाराणसी। आयोजन समिति के मार्गदर्शक प्रशांत हड़ताडकर ने कहा कि हमारे शक्तिपीठ अखंड भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। समाज कल्याण राज्यमंत्री असीम अरुण ने सनातन धर्म का देश विदेश में प्रचार प्रसार के लिए करने के लिए सभी संतों व आचार्यों का आह्वान किया। उच्चशिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि सभी शक्तिपीठ देश के विविधता को दर्शाते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि देवी देश के सभी प्रदेशों को जोड़ती हैं। मां विंध्यवासिनी मंदिर के प्रधान पुजारी अगस्त द्विवेदी ने कहा कि शक्तिपीठ सामाजिक सुधार के केंद्र हैं यहां लोगों को समानता और बंधुत्व का संदेश मिलता है। सुरेश हावड़े ने कहा कि मंदिर के प्रबंधन पर मंदिरों को मार्गदर्शन और ऑर्गेनाइज करना बहुत जरूरी है। अंत में अमित श्रीवास्तव ने नृत्य नाटिका की प्रस्तुति दी। संचालन राष्ट्रीय महामंत्री लक्ष्मी नारायण शर्मा ने किया। स्वागत डॉ. रमन त्रिपाठी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन राजनाथ तिवारी ने किया।