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IMS BHU के वैज्ञानिकों की बड़ी खोज: पित्ताशय कैंसर के जिम्मेदार म्यूटेशन की हुई पहचान, उपचार हो सकता है संभव

Tue, 30 Aug 2022 05:19 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

आईएमएस बीएचयू के वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता मिली है। वैज्ञानिकों ने पित्ताशय (गॉलब्लैडर) कैंसर के लिए जिम्मेदार म्यूटेशन (ड्राइवर म्यूटेशन) की पहचान की है। 
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आईएमएस बीएचयू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आईएमएस बीएचयू के वैज्ञानिकों ने पित्ताशय (गॉलब्लैडर) कैंसर के लिए जिम्मेदार म्यूटेशन (ड्राइवर म्यूटेशन) की पहचान की है। शोध में सामने आया कि पित्ताशय के कैंसर के एमटीओआर, एमपीओके प्रमुख पाथवे हैं। इनमें एमटीओआर के असर को कम करने का तरीका इस प्रकार के कैंसर के उपचार का एक विकल्प हो सकता है।

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सर्जिकल आंकोलॉजी में प्रो. मनोज पांडेय की अगुवाई में हुए शोध में पहली बार पित्त की थैली के कैंसर के म्यूटेशन की जानकारी मिलने के बाद इसका प्रकाशन भी शोध पत्रिका मालिक्यूलर बायोलॉजी रिपोर्ट्स में प्रकाशित हो चुका है। प्रो. पांडेय के अनुसार मानव शरीर में पित्त की थैली यानि गॉलब्लैडर का कार्य पित्त को संग्रहित करना तथा भोजन के बाद पित्त नली के माध्यम से छोटी आंत में पित्त का स्राव करना है।

10-20 प्रतिशत ही ठीक हो पाते हैं मरीज
पित्त की थैली का कैंसर गंगा नदी के बेसिन में रहने वाली आबादी में काफी अधिक देखने को मिलता है। यह कैंसर ज्यादातर 45 वर्ष से अधिक आयु वाली महिलाओं में पाया जाता है। यहीं नहीं पुरुषों की तुलना में यह कैंसर महिलाओं में पांच गुना अधिक होता है।

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पित्ताशय के कैंसर वाले मरीजों के ठीक होने की दर भी 10-20 प्रतिशत ही है। प्रो. मनोज ने बताय कि पित्ताशय के कैंसर के ड्राइवर म्यूटेशन की पहचान पहली बार की गई है, जिससे इस संबंध में लंबे समय से चल रही कश्मकश का काफी हद तक समाधान भी मिल पाया है। यह अध्ययन पित्ताशय के कैंसर के उपचार में एवरोलीमस, टेमसिरोलीमस दवाओं के इस्तेमाल की राह दिखाता है।
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बीएचयू में 25 साल से कैंसर पर चल रहा शोध

सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग के प्रो. मनोज पांडेय के अनुसार बीएचयू में पिछले 25 वर्षों से कैंसर पर शोध हो रहा है, जिसमें इसके कारकों का पता लगाने पर अध्ययन किया जा रहा है। हेवी मेटल और टाइफॉइड कैरियर को भी इस कैंसर के कारकों में माना जाता है। इस बार टीम ने पित्त की थैली के कैंसर के ड्राइवर म्यूटेशन को खोज निकाला है। शोध टीम में डॉ. सत्यविजय चिगुरुपति, डॉ. रोली पुरवर, मोनिका राजपूत, डॉ. मृदुला शुक्ला शामिल हैं।
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