वाराणसी। जमीयत उलमा ए हिंद के सदर मौलाना महमूद असअद मदनी ने कहा कि दीन और आखिरत को संवारने के लिए जरूरी है कि हम अपने ईमान पर कायम रहें। आज जरूरी है कि मां बाप अपने बच्चों को अच्छी तरबियत दें और बच्चों को ये हुक्म है कि वो अपने मां-बाप की खिदमत करें। इससे ही उनकी जिंदगी और आखिरत संवरेगी और समाज में सुधार आएगा।
पुराना पुल स्थित बड़ी ईदगाह में बृहस्पतिवार को आयोजित सीरत कॉन्फ्रेंस के पहले दिन तकरीर में मौलाना महमूद असअद मदनी ने कहा कि मुसलमानों को शादी में होने वाली फिजूलखर्ची को कम करना होगा और दहेज जैसी बुराई का पूरी तरह से खात्मा करें। लखनऊ के मौलाना अब्दुल अली फारूकी ने लोगों को नबी की सुन्नतों पर चलने की ताकीद की। उन्होंने कहा कि नबी की सुन्नतों पर चलना ही सच्ची मुहब्बत है। इसी से इंसान दुनिया और आखिरत में कामयाब होगा। देवबंद से आए मुफ्ती सलमान मंसूरपुरी ने नबी की रहमदिली और लोगों के साथ की जाने वाली भलाई को बयां किया। कहा, उन्होंने समाज में फैली बुुराइयों को मुहब्बत से खत्म कर दिया। उन्हीं के रास्ते पर चलकर हम समाज से बुराइयों को खत्म कर सकते हैं। मुफ्ती-ए-बनारस मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने कहा मुसलमान अपनी जिंदगी कुरान के अनुसार जीएं। संचालन जमियत उलमा बनारस के जनरल सेक्रेटरी अहमद शकील कासमी ने किया।