सोनभद्र। 2015 में तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक एके जैन ने रेणुकूट वन प्रभाग में जंगल की एक लाख हेक्टेअर जमीन लूटने की रिपोर्ट शासन को दी थी। वहीं, एनजीटी ने चार मई 2016 को ऐसे मामलों की जांच कर अवैध नामांतरण निरस्त करने के निर्देश दिए थे। बावजूद अब तक अफसर कागजी कोरमपूर्ति में ही जुटे रहे।
करोड़पतियों के रहन-सहन को मात देते हैं कई लेखपाल-अधिकारी
सोनभद्र। जिले में जमीनों के अवैध नामांतरण के खेल में कई लेखपाल-अधिकारी मालामाल हो गए। कई ने रिश्तेदारों, परिवारीजनों ने नाम दर्जनों बीघे जमीन नामांतरित करा ली। दूसरे जनपद तबादला होने के बावजूद ऊंची पहुंच का इस्तेमाल कर फिर से जिले में तैनाती पा ली। आलीशान घर-मकान बनाकर न सिर्फ यहीं के निवासी भी बन गए बल्कि पेट्रोल पंप तक खोल लिए। इसी तरह सेवानिवृत्ति के बाद भी कई अफसर यहां जमीनों को हथियाने में लगे हुए हैं।
वन प्रभाग के 156 गांवों में से 28 गांवों की फाइलें धारा बीस के प्रकाशन के लिए भेजी जा चुकी हैँ। इसमें पड़ने वाली आपत्तियों का भी समय-समय पर निस्तारण किया गया है। शेष 128 गांवों को भी धारा बीस के प्रकाशन के लिए भेजने के लिए लगातार वन बंदोबस्त अधिकारी से अनुरोध किया जा रहा है।
-एमपी सिंह, डीएफओ रेणुकूट