जिला शहरी विकास प्राधिकरण (डूडा) और जिला होमगार्ड कमांडेंट कार्यालय को पता नहीं चला और उन्हें आवंटित जमीन पर किसी और का कब्जा हो गया। सेंट्रल जेल रोड स्थित नगर निगम की करीब 302 एयर जमीन पर शेल्टर होम और होमगार्ड कमांडेंट कार्यालय का निर्माण प्रस्तावित है।
शेल्टर होम तो लगभग बनकर तैयार हो चुका है। इस पर 47 लाख रुपये भी खर्च हो चुके हैं। काम चल ही रहा था कि अपर उप जिलाधिकारी की अदालत ने होटल कारोबारी हीरालाल जायसवाल के पक्ष में नगर निगम की 302 एयर जमीन के विनिमय का आदेश कर दिया।
डूडा और होमगार्ड कमांडेंट कार्यालय के अधिकारियों को इस विनिमय की जानकारी ही नहीं थी। दोनों सरकारी संस्थाओं ने ऐसा कोई प्रस्ताव भी नहीं दिया था। अमर उजाला में प्रकाशित खबर पढ़ने के बाद उन्हें इसकी जानकारी हुई, जिससे वह हतप्रभ हैं।
भीमनगर में नगर निगम की 302 एयर जमीन (करीब डेढ़ बीघा) है। खाली जमीन पर प्रशासन ने शेल्टर होम बनाने का प्रस्ताव बनाया था। शासन ने इसकी मंजूरी देने के साथ ही एक करोड़ 18 लाख का बजट दे दिया। इसके लिए पहली किस्त के रूप में 47 लाख 45 हजार रुपये जारी कर दिए गए, जिसका पूरा काम हो चुका है।
पैसे खत्म होने के कारण पिछले करीब पंद्रह दिनों से काम बंद है। दीवार और जमीन का प्लास्टर का काम बाकी है। वहीं नगर निगम की आठ बिस्वा जमीन जिला होमगार्ड कमांडेंट कार्यालय बनने के लिए प्रस्तावित है। नगर निगम सदन की बैठक में मंजूरी के बाद इसका निर्माण शुरू होगा।
इस जमीन पर डूडा और होमगार्ड कमांडेंट कार्यालय का बोर्ड भी लगा हुआ है। एसीएम चतुर्थ त्रिभुवन की ओर से डीएम योगेश्वर राम मिश्र को भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक इसी बीच अपर उप जिलाधिकारी बसंत कुमार गुप्ता ने पूर्व सांसद जवाहर लाल जायसवाल के भाई हीरालाल जायसवाल के पक्ष में नगर निगम की 302 एयर जमीन के विनिमय का आदेश कर दिया।
हैरत वाली बात यह है कि हीरालाल की ओर से निगम को जो जमीन दी गई है कि उस पर पहले से ही लोगों के मकान बने हुए हैं। उस जमीन पर कब्जा लेना निगम और प्रशासन के लिए आसान नहीं होगा।