बिना अनुमति बसी अवैध कालोनियों ने बनारस के विकास की राह में बाधा बनी हैं। शहरी क्षेत्र में 237 चिन्हित अवैध कालोनियों में सड़क, बिजली, पानी सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं अब तक नहीं पहुंच पाई हैं। कारण, सुनियोजित नहीं होने के कारण अवैध कालोनियों में ना तो मानक के अनुरुप सड़कें हैं और ना ही जनसुविधाएं। ऐसे में यहां रहने वाले अपने घर बनाने के बाद सुविधाओं के चक्कर काट रहे हैं। विकास की नई ऊंचाई की ओर से बढ़ रहे बनारस की चमकती तस्वीर के पीछे अवैध कालोनियों में असुविधाओं का स्याह सच भी है। हालांकि पिछले सालों में अवैध कालोनियों में विकास प्राधिकरण, नगर निगम, बिजली, सहित अन्य विभागों के अधिकारियों ने अपने निजी हितों में यहां सरकारी धन खर्च किया है।
अवैध कालोनियों पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता की टिप्पणी से बनारस का दर्द भी कुरद गया है। दरअसल, बनारस में कॉलोनियों के अवैध होने के बावजूद बिजली, पानी और सीवेज के वैध कनेक्शन जारी कर दिए गए। सरकारी रकम से सड़कें बनवा दी गईं। अब बड़ा सवाल यह है कि जब वीडीए का दावा है कि ये कॉलोनियां अवैध हैं तो वहां बिजली-पानी के वैध कनेक्शन और नगर निगम की ओर से मकान नंबर जारी कैसे कर दिए गए। शहर के बुनियादी संसाधनों का ढांचा चरमराने की बड़ी वजह ये अवैध कॉलोनियां हैं। वीडीए से बिना ले आउट और नक्शा पास कराए ही कॉलोनियां बनती चली गईं।
शासन में लंबित है अवैध कालोनियों के नियमित होने का मामला
दरअसल, विकास प्राधिकरण ने वर्ष 2020 में अवैध कालोनियों को नियमित करने के प्रयास में जुटा था। हालांकि अब तक इस निर्णय नहीं हो पाया और अवैध कालोनियों में अवस्थापना से होने वाले कामों पर मंडलायुक्त ने रोक लगा दी थी। ताकि अवैध कालोनियों पर लगाम कसी जा सके। शासन में अवैध कालोनियों को लेकर नए नियम निर्धारित होने हैं।
अवैध कालोनियों के खिलाफ हमारी लगातार कार्रवाई चलती है। वीडीए हमेशा नियोजित विकास के लिए लगातार लोगों को प्रेरित करता है। मगर, कई बार लोग छोटे लाभ में अपने भविष्य के बड़े नुकसान का फैसला करते हैं। अवैध कालोनियों में मकानां तक नक्शा स्वीकृत नहीं होने से बैंक लोन आदि में दिक्कत आती है। सड़कें बहुत कम चौड़ी होती हैं और पार्क आदि की सुविधा भी नहीं मिलती। पहले से बस चुकी अवैध कालोनियों को नियमित कराने के लिए शासन स्तर से प्रयास किया जा रहा है।
ईशा दुहन, वीडीए उपाध्यक्ष