रजिस्ट्री प्रक्रिया में अधिवक्ताओं की भूमिका पर दिए गए बयान के बाद उपजे विवाद पर स्टांप राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल ने बुधवार को अपना पक्ष रखकर सफाई दी। उन्होंने आंदोलन कर रहे अधिवक्ताओं को नादान बताते हुए विपक्ष से गुमराह होने का आरोप लगाया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि निबंधन कार्यालय में अधिवक्ताओं के आनेजाने या प्रैक्टिस पर कोई रोक नहीं है। क्रेता और विक्रेता अपनी सुविधा के अनुसार अधिवक्ताओं को ले जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि निबंधन भारत सरकार का एक्ट है। राज्य सरकार नियम में बदलाव नहीं कर सकती है। दो पक्ष तय वायदे के हिसाब से संपत्ति का पंजीयन कराते हैं। वह सीधे निबंधन कार्यालय में रजिस्ट्री करा सकते हैं। अगर उन्हें अधिवक्ता को साथ लाना है तो उसमें किसी तरह की रोक नहीं है। उन्होंने कहा कि रजिस्ट्रेशन एक्ट-1908 की धारा 32 के तहत रजिस्ट्री के दौरान अधिवक्ताओं की मौजूदगी जरूरी नहीं है। क्रेता और विक्रेता अगर चाहें तो उनकी मदद ले सकते हैं। ऑनलाइन व्यवस्था के तहत विभाग की वेबसाइट पर रजिस्ट्री की प्रक्रिया को स्वयं संपन्न करने की जानकारी उपलब्ध कराई गई है। लोग कागजात खुद तैयार कर सकते हैं। वेबसाइट पर ही सर्किल रेट का भी पता लगा सकते हैं। भुगतान भी ऑनलाइन हो जाएगा। कुछ लोग अधिवक्ताओं को भ्रमित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के बेहतर प्रयासों में अड़चन डालने के लिए विरोधी साजिश रच रहे है। उन्होंने कहा कि मैं भी अधिवक्ता हूं और अपने साथियों का अहित किसी भी प्रकार से नहीं सोच सकता।