एम्स और आईसीएमआर का समर्थन
इस रिसर्च में राष्ट्रीय प्रतिरक्षा विज्ञान संस्थान की डॉ. सारिका गुप्ता, एम्स नई दिल्ली के डॉ. सरोज कुमार, डॉ. साईराम कृष्णमूर्ति, बीएचयू के जैव रसायन विभाग के डॉ. श्रीकृष्णा सरिपेला और आईआईटी बीएचयू के रसायन विज्ञान विभाग के डॉ. वी. रमणाथन शामिल रहे। इस शोध का वित्तीय सहयोग भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन नई दिल्ली की ओर से किया गया।
न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों से निपटने का बड़ा कदम
निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि यह शोध हमारे समय की सबसे चुनौतीपूर्ण न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों में निपटने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने पूरी शोध टीम और सहयोगी संस्थानों को इस उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए बधाई दी। कहा कि ऐसे प्रभावशाली शोध समाज के लिए सुलभ और किफायती स्वास्थ्य समाधान विकसित करने के हमारे संकल्प को मजबूत करते हैं।
सिंगापुर-मलयेशिया में बीएचयू के प्रोफेसर आयोजन सचिव
वाराणसी। सिंगापुर और मलयेशिया में दक्षिण एशियाई समाजशास्त्रीय परिषद की ओर से किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन सचिव बीएचयू के समाजशास्त्री प्रो. आरएन त्रिपाठी को बनाया गया है। इस सम्मेलन में विज्ञान, तकनीक और समाज को लेकर 13 मार्च तक संवाद होंगे। कार्यक्रम के दूसरे आयेाजन सचिव आंबेडकर विवि लखनऊ के प्रो. बिभूति भूषण मलिक हैं।
इस सम्मेलन में डिजिटल परिवर्तन, आधार और यूपीआई जैसी डिजिटल, एआई, जलवायु संकट, ज्ञान और सत्ता के संबंध पर मंथन हुआ। प्रो. आरएन त्रिपाठी ने विचार रखे। रोमा ट्रे विवि, रोम के समाजशास्त्री प्रो. रॉबर्टो सिप्रियानी, पेंसिल्वेनिया से धर्म, दर्शनशास्त्री प्रो. जेफरी डी. लॉन्ग, कार्ल डब्ल्यू. जिग्लर, मिनेसोटा से डॉ. अबिन ओझा, मॉरीशस विश्वविद्यालय से समाजशास्त्री प्रो. राजेन सुनतू माॅरिसस और बीएचयू प्रो. डीआर साहू मौजूद रहे।