प्रो उमेश कुमार ने बताया कि काशी विश्वनाथ मंदिर के स्ट्रक्चर की जांच की गई है। मूल स्वरूप को बरकरार रखते हुए इसे किस तरह संरक्षित किया जाए, इसका अध्ययन किया जा रहा है। मंदिर के कुछ हिस्सों में काफी पहले पेंट लगा दिया गया था। इसमें मिले केमिकल से पत्थरों को काफी नुकसान पहुंचा है।
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इन बिंदुओं पर हुई जांच :
आईआईटी रुड़की की टीम ने मूल मंदिर के चारों दरवाजों, फर्श, नींव और दीवारों की जांच की। गर्भ गृह में जाकर अंदर से शिखर का निरीक्षण किया। बैकुंठ महादेव के शिखर और खंभों की भी जांच की गई। दंडपाणि महादेव के गर्भ गृह के निरीक्षण के बाद नींव आदि का अध्ययन किया गया है। टीम ने मंदिर के बाहरी आवरण को नुकसान पहुंचाने वाले कारण भी तलाशे।
धाम से पहले मंदिर किया जाएगा संरक्षित :
सब कुछ ठीक रहा तो काशी विश्वनाथ धाम बनने से पहले बाबा का मंदिर बदला नजर आएगा। मंदिर प्रशासन का मानना है कि धाम का निर्माण कार्य पूरा होने काफी समय लगेगा। लिहाजा इससे पहले मंदिर के संरक्षण पर काम करा लिया जाए। आईआईटी की टीम ने मंदिर के मूल स्वरूप में बिना बदलाव किए क्या-क्या काम कराए जा सकते हैं, इस पर भी रिपोर्ट सौंपेगी।
तहसीलदार अविनाश कुमार ने बताया कि काशी विश्वनाथ मंदिर के क्षरण की जांच करने के लिए आईआईटी रुड़की की टीम आई थी। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।