आईआईटी बीएचयू में सिविल इंजीनियरिंग के एक छात्र के लघु शोध को उसके सीनियर छात्रों ने न सिर्फ चुराया बल्कि अपने नाम से अंतरराष्ट्रीय स्तर की शोध पत्रिका में प्रकाशित भी करा लिया। रिसर्च प्रकाशित होने की जानकारी होने पर जूनियर छात्र ने इसकी शिकायत हेड से की। छात्र के रिसर्च चोरी होने और उसकी पाइरेसी से आईआईटी में हड़कंप मच गया है। हालांकि इस बारे में उच्चाधिकारी कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं।
आईआईटी बीएचयू में सिविल इंजीनियरिंग विभाग के शोध छात्र अश्विनी अग्निहोत्री ने एमटेक में ‘डिटेक्शन ऑफ कोर्स चेंज ऑफ रिवर राम गंगा यूजिंग रिमोट सेंसिंग एंड जीआईएस’ विषय पर शोध पत्र जमा किया था। पीएचडी में पंजीकृत होने के बाद वह इसी शोध पर आगे काम कर रहा था। छात्र का आरोप है कि उसके इस लघु शोध को सिविल इंजीनियरिंग और माइनिंग इंजीनियरिंग के दो छात्रों ने अपने नाम से अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका ‘वेदर एंड क्लाइमेट एक्स्ट्रीम्स’ में ‘इवेल्यूएशन ऑफ कोर्स चेंज डिटेक्शन ऑफ रामगंगा रिवर यूजिंग रिमोट सेंसिंग एंड जीआईएस’ शीर्षक से प्रकाशित कराया है। पत्रिका में 17 अगस्त, 2016 को प्रकाशित इस लघु शोध की एक-एक पंक्ति उसकी है।
अश्विनी को इसकी जानकारी तब हुई जब वह अपने रिसर्च टॉपिक से जुड़े तथ्य गूगल पर सर्च कर रहा था। सर्चिंग के दौरान ही उसे अपनी सीनियर के नाम से प्रकाशित ये रिसर्च पेपर मिला। उसने इसकी शिकायत अपने गाइड डॉ. अनुराग ओहरी से की। छात्र का आरोप सही पाए जाने पर डॉ. ओहरी ने रिसर्च पेपर के एडिटोरियल बोर्ड से इसकी शिकायत की है।
रिसर्च पाइरेसी का मामला सामने आने के बाद आईआईटी बीएचयू के छात्र संसद की पीजी एकेडमिक अफेयर कमेटी के संयोजक यग्नेश शादांगी ने सभी रिसर्च स्कॉलर को मेल जारी कर उन्हें सचेत किया है। कहा है कि वे अपने रिसर्च वर्क और शोध पत्र को लेकर किसी सीनियर या साथी पर यकीन न करें। इससे जुड़े तथ्य अपने गाइड के सिवा किसी और से साझा न करें।