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आईआईटी बीएचयू की नई तकनीक: खेतों के पाइप और फाइल फोल्डर के वेस्ट प्लास्टिक से बनी एनएच-44 की सड़क

Tue, 29 Sep 2026 05:55 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

आईआईटी बीएचयू की नई तकनीक के जरिये खेतों के पाइप और फाइल फोल्डर के वेस्ट प्लास्टिक से एनएच-44 की सड़क बनी। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सहयोग से विकसित इस तकनीक का पेटेंट भी कराया गया है।
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road - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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खेतों में सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाले पुराने प्लास्टिक पाइप, केन और फाइल-फोल्डर्स के वेस्ट प्लास्टिक से आईआईटी-बीएचयू ने सड़क निर्माण की नई तकनीक विकसित की है। इस तकनीक से झांसी-ललितपुर खंड में एनएच-44 पर करीब एक किलोमीटर सड़क तैयार की गई है। 

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सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सहयोग से विकसित इस तकनीक का पेटेंट भी कराया गया है। सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. अंकित गुप्ता और उनकी शोध टीम ने वेस्ट प्लास्टिक मॉडिफाइड बिटुमेन तैयार करने के लिए वेट-प्रोसेस तकनीक विकसित की है। 

अब तक प्लास्टिक कचरे से सड़क बनाने में मुख्य रूप से ड्राई-प्रोसेस तकनीक का इस्तेमाल होता रहा है। इसमें गर्म डामर में प्लास्टिक मिलाया जाता है। नई तकनीक में अनुपयोगी प्लास्टिक को पहले तैयार कर बिटुमिनस बाइंडर में मिलाया जाता है।
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प्रो. अंकित गुप्ता ने बताया कि सड़क को करीब 70 मिलियन स्टैंडर्ड एक्सल (एमएसए) के यातायात भार को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यानी सड़क को सात करोड़ मानक एक्सल के बराबर यातायात भार सहने की क्षमता के अनुरूप तैयार किया गया है। 
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एक किलोमीटर सड़क के निर्माण में करीब 1,350 किलोग्राम अनुपयोगी एलडीपीई प्लास्टिक का इस्तेमाल हुआ है। अलग-अलग स्रोतों से एकत्र एलडीपीई प्लास्टिक को पेलेट के रूप में तैयार किया गया और फिर बिटुमेन में मिलाया गया। इसमें बिटुमेन के वजन के मुकाबले करीब तीन से चार प्रतिशत प्लास्टिक का इस्तेमाल किया गया।  

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