अयस्कों में लौह की मात्रा कम और अशुद्धियां ज्यादा
पारंपरिक लौह निर्माण प्रक्रिया वैश्विक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 7-8 फीसदी का योगदान देती है। कोयला आधारित प्रक्रियाओं से प्रति टन इस्पात उत्पादन पर लगभग 2 टन कार्बन उत्सर्जित होता है।
इसके बाद इन पेलेट्स को वातावरण में हाइड्रोजन गैस के संपर्क में लाया जाता है। इससे अयस्क से ऑक्सीजन हट जाती है और शुरू लोहा प्राप्त हो जाता है। फिर गर्म करने पर धातु और अपशिष्ट (स्लैग) अपने-आप अलग हो जाते हैं और छोटे-छोटे शुद्ध धातु के नगेट्स बनते हैं।
इको फ्रेंडली और उपयोगी तकनीक के विकास की दिशा में काम चल रहा है। यह नई हाइड्रोजन-आधारित तकनीक कम प्रदूषण, कम ऊर्जा खपत और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक बड़ा कदम है। - प्रो. अमित पात्रा, निदेशक, आईआईटी बीएचयू