वहीं, इनमें से 15 छात्र मैकेनिकल और आठ छात्र इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के थे। अंग्रेजी शासन काल में इंजीनियरिंग कर निकले कई छात्र देश की आजादी के लिए क्रांतिकारियों के साथ लड़े। कुछ तो कई स्वतंत्रता सेनानी बनकर देश की सेवा में लगे रहे।
जिन छात्रों को फर्स्ट डिवीजन मिला उनमें से एक छात्र मैकेनिकल के जी विश्वनाथम थे। इनका एनरोलमेंट नंबर 2221 और पिता गोपाल स्वामी अय्यर थे। दूसरे छात्र इलेक्ट्रिकल ब्रांच से केशव विश्वनाथ कार्डिले थे। इनका एनरोलमेंट नंबर 2208 और पिता विश्वनाथ गणेश कार्डिले थे। 1925 से पहले 1923 में साइंस इंजीनियरिंग के 14 छात्रों को उपाधि मिली थी। इसमें कोई इंजीनियरिंग का खास ब्रांच नहीं था।
1925 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के उपाधि धारकों की सूची
- उपाधि धारक डिवीजन
- जी विश्वनाथम फर्स्ट
- हरिपदा भादुड़ी सेकंड
- जय कृष्णा दास सेकंड
- सरोजपानी चौधरी सेकंड
- सुरिंद्र नाथ बसु सेकंड
- श्याम लाल सक्सेना सेकंड
- बिमल कांति बैनर्जी सेकंड
- अनंत कुमार बोस थर्ड
- अंकुल चंद्र सेन थर्ड
- आशिता रंजन घोष थर्ड
- आशुतोष पॉल थर्ड
- बिनोय कुमार मित्रा थर्ड
- विजेंद्र नाथ चटर्जी थर्ड
- निर्मल चंद्रा थर्ड
- राधा गोविंद दास थर्ड
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के उपाधि धारक
केशव कार्डिले फर्स्ट
देवी दास सेकंड
दिनकर श्रीधर सेकंड
सुधांशु रंजन सेकंड
जेठा नंद सेकंड
राधा कृष्ण थर्ड
कुंदन लाल थर्ड
सुरिंद्र मजूमदार थर्ड