24 जुलाई को शाम पांच बजे तक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया बंद कर दी जाएगी। छह दिनों का इंडक्शन कार्यक्रम होगा। 24 जुलाई तक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ तो उसके बाद आईआईटी में प्रवेश नहीं मिलेगा। पहले राउंड की काउंसिलिंग पूरी: अभी जेईई एडवांस्ड परीक्षा - 2025 की काउंसिलिंग चल रही है।
पहले राउंड का रिजल्ट जारी हो चुका है। इसमें आईआईटी बीएचयू के कंप्यूटर साइंस का जनरल कटऑफ रैंक 704 से लेकर 1350 तक गया था। सबसे आखिरी जनरल कटऑफ रैंक फार्मास्यूटिकल इंजीनियरिंग विभाग का 11300 से लेकर 12976 तक आया था।
शिक्षकों को डिजिटल फ्रेंडली बनाएगा आईआईटी बीएचयू, क्यूआईपी-पीजी प्रमाणन कार्यक्रम की शुरुआत
देश भर के कई शिक्षकों को औद्योगिक क्षेत्र में डिजिटल फ्रेंडली बनाने के लिए आईआईटी बीएचयू में मंगलवार को एआईसीटीई क्यूआईपी–पीजी प्रमाणन कार्यक्रम शुरू किया गया। इसकी अवधि छह महीने की है। संस्थान के प्रिसिजन इंजीनियरिंग हब में कक्षाएं मंगलवार से शुरू हो चुकी हैं। यहां से सीखे शिक्षक अपने- अपने संस्थानों के छात्र-छात्राओं को डिजिटल लर्निंग कराएंगे। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद की ओर से क्वालिटी इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम के तहत कार्यक्रम शुरू किया गया है।
आईआईटी के आठ शिक्षक संचालन कर रहे हैं। उनका कहना है कि यहां पर स्मार्ट मैन्यूफैक्चरिंग के साथ ही नई-नई तकनीक पर कमांड बनाया जाएगा। इस कार्यक्रम का पूरा नाम है- आईओटी और मैन्युफैक्चरिंग : विधियां, प्रक्रियाएं, अनुप्रयोग और तकनीक। इस सर्टिफिकेशन कार्यक्रम में देश के 9 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से 36 संकाय सदस्य भाग ले रहे हैं। इनमें से 25 प्रतिभागी पीएचडी धारक हैं। इनकी विशेषज्ञता इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिसिटी इंजीनियरिंग में है।
इंडस्ट्री 4.0 से बढ़ेगी भारत की क्षमता
प्रो. एनके मुखोपाध्याय ने कहा कि इंडस्ट्री 4.0 और उन्नत निर्माण क्षेत्र में भारत की क्षमताओं को मजबूत करने के लिए ऐसे कार्यक्रम जरूरी हैं। शिक्षकों को आईओटी, ऑटोमेशन और स्मार्ट सिस्टम्स जैसी व्यावहारिक डिजिटल तकनीक से लैस बनाया जाएगा। डीआरडीओ के नोडल डॉ. तपस कुमार नंदी ने कहा कि तकनीक की सहायता से एकेडमिक और औद्योगिक क्षेत्र में सहयोग को बेहतर किया जाएगा।
प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे अपने शिक्षण और अनुसंधान कार्यों को राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास लक्ष्यों, विशेष तौर पर सामग्री नवाचार और रणनीतिक तकनीक के जैसा ही बनाएं। डॉ. जीएम कार्तिक ने कहा कि यहां पर आए शिक्षकों को मिलने वाला व्यावसायिक विकास, सहयोगात्मक शिक्षण और कौशल हस्तांतरण का अत्याधुनिक तकनीकी ज्ञान उनके विद्यार्थियों और संस्थानों को सक्षम बनाएगा।