2025-26 सत्र से प्रवेश लेने वाले छात्रों को आईआईटी बीएचयू के पाठ्यक्रमों में कई बड़े बदलाव दिखाई देंगे। चौथे सेमेस्टर के अंत में छात्रों को पांच शैक्षणिक विकल्प दिए जाएंगे, जो कि मेरिट और च्वाइस के आधार पर तय होंगे। अब यहां पर बीटेक और एमटेक डिग्री एक साथ ली जा सकेगी। पांच साल तक 10 सेमेस्टर की पढ़ाई करनी होगी। जबकि सामान्य तौर पर दोनों डिग्रियों को मिलाकर कुल 12 सेमेस्टर होते हैं।
अब बीटेक में एक साल पूरा करने के बाद ब्रांच नहीं बदला जा सकता। क्योंकि अब इसकी जगह मेजर और माइनर विषयों का प्रावधान कर दिया गया है। संस्थान ने मल्टीपल एग्जिट फ्रेमवर्क भी लागू कर दिया है, जिसके तहत छात्रों को मिली क्रेडिट के अनुसार ही बीटेक कोर्स बीच में छोड़ने पर अलग-अलग डिग्रियां मिलेंगी। एक वर्ष के बाद बीटेक छोड़ने पर इंटरिम लीविंग सर्टिफिकेट, दो वर्षों के बाद डिप्लोमा सर्टिफिकेट, तीन वर्षों के बाद बीएससी इन इंजीनियरिंग की डिग्री मिलेगी।
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हर एक को मिलेगी दो स्ट्रीम की माइनर डिग्री
यदि कोई छात्र बीटेक कोर्स में प्रवेश लेता है और अपने पांचवें, सातवें और आठवें सेमेस्टर में किसी अन्य इंजीनियरिंग ब्रांच के कम से कम चार और अधिकतम छह कोर्स की पढ़ाई उत्तीर्ण करता है तो उसे दो स्ट्रीम की बीटेक माइनर डिग्री मिलेगी।
माइनर के साथ मिलेगी दो मेजर डिग्री
बीटेक माइनर डिग्री करने वाला छात्र यदि इसी स्ट्रीम में 10 सेमेस्टर की पढ़ाई उत्तीर्ण कर लेगा तो उसे बीटेक में दो इंजीनियरिंग की डिग्री (बीटेक सेकेंड मेजर) मिलेगी।