आईआईटी बीएचयू का 14वां दीक्षांत समारोह
- फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय मंत्री की अनुपस्थिति में उनका स्मृति चिह्न निदेशक प्रो. पात्रा खुद ही उठाकर दर्शकों का आभार जताने लगे। इस दौरान सभागार के मौजूद छात्र-छात्राएं ठहाके मारकर हंस पड़े और तालियां बजाई।
3 गरीब छात्रों को मिले 30 हजार
संस्थान में तीन गरीब छात्रों मेटलर्जी ब्रांच के कंबम हरीदेव, शशांक गौड़ और पीयूष रंजन को 10-10 हजार रुपये दिए गए। इनके परिवार की आय 5 लाख रुपये से कम होने के चलते इनका चयन किया गया था। साहिल को यूपी के पूर्व मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी के पिता के नाम पर आदित्य अवस्थी इंडोमेंट अवॉर्ड के तहत एक लाख रुपये दिए गए।
आईआईटी बीएचयू का 14वां दीक्षांत समारोह
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एक साल में 31 से ज्यादा नए शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। नई शिक्षा नीति के तहत स्नातक कोर्स के नए सिलेबस को इस साल जुलाई में लागू कर दिया गया। जुलाई के बाद प्रवेश लेने वालों के लिए मल्टी एग्जिट पॉइंट लागू किया गया। एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट सिस्टम को लागू किया गया। पीएचडी छात्र अपने डॉक्टरेट कार्यक्रम के दौरान विदेशी कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए 2 लाख तक का अनुदान प्राप्त कर सकते हैं। संस्थान में 330 करोड़ से ज्यादा के 590 प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं। इस साल पहला एलुमनी चुनाव कराया गया। कुल 550 पुरा छात्र संस्थान से जुड़ चुके हैं। वहीं वैज्ञानिक खोजों और विकास के लिए एक साल में कुल 23 समझौते किए गए।
इतनी उपाधियां मिलीं
- बीटेक - 1090
- आईडीडी- 363
- एमटेक/एमफार्म - 282
- पीएचडी - 196
- एमएससी - 48
- बी.आर्क - 16
आईआईटी में दीक्षांत समारोह में पदक पाने का सपना जो देखा था, वह पूरा हुआ। इस तरह की उपलब्धि से आगे के जीवन में नई जिम्मेदारियों से काम करने की प्रेरणा मिली है। संस्थान में रहकर धैर्य, अनुशासन के साथ काम करते रहने की सीख मिली है, यह अहम है। -डी नागेंद्र द्वारकानाथ, एमटेक मैकेनिकल इंजीनियरिंग
खनन अभियांत्रिकी के क्षेत्र में ही आगे काम करना है। इसी वजह से इंट्रीग्रेटेड ड्यूअल डिग्री (बीटेक-एमटेक) हासिल की है। जिस संस्थान से पढ़ाई की है, वहां गुरुओं, विद्यार्थियों के बीच में पदक पाना बड़ी उपलब्धि है। -श्रेया, आईडीडी
सिविल इंजीनियरिंग से बीटेक करने के बाद आगे चलकर साॅफ्टवेयर इंजीनियर बनना है। इस क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के माध्यम से बहुत कुछ नया करने का दायरा बढ़ता जा रहा है। पदक पाने के बाद अब नई ऊर्जा के साथ काम करना है। -सार्थक आनंद, बीटेक सिविल इंजीनियरिंग