गर्मी की छुट्टियों में हिल स्टेशन जाने का प्लान बना रहे हैं तो एक बार ट्रेनों की स्थिति जरूर देख लें। उत्तराखंड जाने वाली ट्रेनों में सीटें वेटिंग हो चुकी हैं। देहरादून, ऋषिकेश, काठगोदाम जाने वाली ट्रेनों में 25 मई तक सीटें नहीं हैं। लंबी-लंबी वेटिंग शुरू हो चुकी है। कुंभ समेत कुछ ट्रेनों में तो सीटें रिग्रेट भी शो करने लगी हैं।
ऐसे में पहाड़ की वादियाें की राह थोड़ी मुश्किल हो सकती है। टूर ऑपरेटर भी चिंतित हैं। क्योंकि, बाबतपुर एयरपोर्ट से सीधी विमान सेवा भी नहीं है। निजी साधन से जाना ही एक मात्र विकल्प बच रहा है।
कैंट स्टेशन स्थित मुख्य आरक्षण केंद्र के पर्यवेक्षकों ने बताया कि आरक्षण अब 60 दिन तक का हो रहा है।
वहीं, गर्मी की छुटि्टयों में उत्तराखंड जाने वाले यात्रियों के आरक्षण फाॅर्म अधिक आ रहे हैं। विंडो टिकट लोग करवा रहे हैं। हालांकि, देहरादून, काठगोदाम, ऋषिकेश, मसूरी जाने वाली ट्रेनों में लंबी वेटिंग हो चली है। हावड़ा से काशी होकर देहरादून जाने वाली कुंभ एक्सप्रेस के स्लीपर में 25 मई तक सीटें रिग्रेट शो कर रही हैं। एसी में लंबी वेटिंग है।
यही हाल 12327 उपासना एक्सप्रेस के स्लीपर का है। इसमें भी सीटें रिग्रेट है। 15119 बनारस-देहरादून एक्सप्रेस में भी सीटें नहीं हैं। 13009 दून एक्सप्रेस के सभी श्रेणियों में सीटें वेटिंग हैं। यही नहीं, पीडीडीयूनगर से उत्तराखंड जाने वाली ट्रेनों में भी सीटें नहीं हैं।
टूर ऑपरेटर आकाश तिवारी ने बताया कि गर्मी की छुट्टियां अप्रैल से शुरू हो रही हैं लेकिन उत्तराखंड घूमने का प्लान बनाने वालों को ट्रेनों में कंफर्म सीटें नहीं मिल रही हैं। अप्रैल और मई के अंतिम सप्ताह से पहले तक ट्रेनों में सीटें नहीं हैं। प्रमुख और नियमित ट्रेनों के स्लीपर की सीटें रिग्रेट हो चुकी हैं।
मुंबई से पूर्वांचल लौटना नहीं आसान
मुंबई से वाराणसी समेत पूर्वांचल के जिलों में आना भी नहीं आसान है। अप्रैल, 25 मई तक की सीटें फुल चल रही हैं। वापसी में आने वाले यात्री परेशान है कि कैसे वह घर लौटे। पूर्वांचल के बहुत से कामगार और लोग मुंबई, सूरत और गुजरात में रहते हैं। गर्मी की छुट्टियों में वह अपने गांव और घर लौटते हैं। महानगरी, कामायनी, पवन, दादर-गोरखपुर, एलटीटी-गोरखपुर, एलटीटी-बनारस समेत अन्य ट्रेनों में कंफर्म सीटें नहीं हैं।