ऐसा करते देख घर में कोहराम मच गया। परिवार के लोग धरहरा के लिए रवाना हो गए। कणाद पांच भाइयों में सबसे छोटा था। छह माह पहले उसकी मां का निधन हो गया था।
अपने घर से हार गया। अपने भाइयों से हार गया। कुछ लोग, जिन्हें मैं अपना मानता था उनसे हार गया। मैं अपनी पत्नी से माफी मांगूगा, अपने परिवार से और पिता से माफी मांगूगा। पिता जी मैं आपके लायक कभी नहीं बन पाया। जैसा आप चाहते थे वैसा बेटा नहीं बन पाया। लेकिन शायद वैसा बेटा था । एक रुपया भी नहीं कमा पाया लेकिन एक लाख की इज्जत करता हूं मैं। अब सब खत्म। फिर बनारसी लहजे में बोला-डरियेगा नहीं पापा, रोइयेगा नहीं पापा। इतना बोलकर वो उठा और पंखे के सहारे फंदे से झूल गया।