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Varanasi News: आपको देखकर देखता रह गया...

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काशी कला कस्तूरी और अंजोरा की ओर से रूह-ए-मौसिकी शाम-ए-गजल का आयोजन रविवार को गंगा महल में हुआ। गंगा किनारे सजी शाम-ए-गजल की सुरमयी शाम को दो खूबसूरत आवाजों ने बेहतरीन गजलों को तरन्नुम दिया। महफिल में आए हुए मेहमानों ने भी गजल के समंदर में खूब गोता लगाया।
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मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य संजीव कुमार सिंह ने वसीम बरेलवी की गजल आपको देख कर देखता रह गया... और गजल घुंघरू टूट गए... की प्रस्तुति दी। डॉ. जया शाही ने बेगम अख्तर की मशहूर गजल मेरे हम नफस मेरे हमनवां, मेहंदी हसन की गजल रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ जा, दुनिया जिसे कहते है जादू का खिलौना है... गाकर महफिल को खुशनुमा बना दिया। अंत में दोनों कलाकारों ने गजल राहों पर नजर रखना... गाकर लोगों की शाम को और खूबसूरत बना दिया। तबले पर श्रीकांत मिश्र और हारमोनियम पर मोहित साहनी ने संगत की। डॉ. शबनम ने स्वागत किया। श्याम कृष्ण अग्रवाल ने कलाकारों और अतिथियों का अभिनंदन किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रभाश झा ने किया। इस अवसर पर पंडित पूरन महाराज, पंडित गणेश मिश्र,पंडित कामेश्वर नाथ मिश्र,प्रो. पीके मिश्र, प्रो. सुनील चौधरी, डॉ. प्रेमसुंदरी, हीरालाल मिश्र मौजूद थे।
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