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वाराणसी: दशाश्वमेध घाट पर खुदाई में मिला सैकड़ों साल पुराना नाला, जल निगम को जांच के निर्देश

Tue, 01 Sep 2020 10:37 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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खुदाई में मिला नाला। - फोटो : अमर उजाला
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वाराणसी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चेतावनी के बाद राजकीय निर्माण निगम, जल निगम और स्मार्ट सिटी के तहत काम तेज किया। इसी दौरान दशाश्वमेध मार्ग पर हाइड्रोलिक गेट लगाने के लिए खुदाई का काम चल रहा था। इसी बीच नीचे सुरंग जैसी चीज दिखाई पड़ी। इसके बाद वहां मजमा लग गया। हर कोई कौतूहल से देखने लगा। सूचना पाकर मौके पर पहुंचे राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार डॉ नीलकंठ तिवारी ने निरीक्षण किया।

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इसके बाद गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अधिकारियों को बुलाया। उन्होंने कहा कि इसका पता लगाएं कि कहां से कहां तक नाला है। उसकी साफ-सफाई, मरम्मत का काम कराने के बाद हाइड्रोलिक गेट का काम पूरा करें।


स्मार्ट सिटी, राजकीय निर्माण निगम, पर्यटन विभाग की तरफ से बनाए जा रहे पाथवे के निर्माण कार्य के दौरान उसे शाही नाला बताया गया। क्षेत्र के पार्षद नरसिंह बाबा ने बताया कि मान मंदिर की ओर से एक नाला आया है। जो शाही नाले में जाकर मिला हुआ है। संभवत यह वही नाला है। पिछले दिनों कबीर चौरा इलाके में नगर आयुक्त गौरांग राठी ने निरीक्षण कर शाही नाले की सफाई के दौरान बंद हो चुके कनेक्शन को जोड़ने के लिए कहा था। लेकिन जल निगम ने अब तक यह काम पूरा नहीं किया।

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क्षेत्र के पार्षद सीताराम केसरी ने कहा कि जल निगम को ही नहीं पता है कि शाही नाले की वास्तविक स्थिति क्या है। ऐसी स्थिति में वे ऊपर-ऊपर ही काम कर रहे हैं। नीचे जाने की किसी के पास कोई टेक्निक नहीं है।

शाही नाले की सफाई 1700 मीटर शेष
शाही नाले की कुल लंबाई 7.12 किलोमीटर के सापेक्ष दो फेज में कुल 17 सौ मीटर की सफाई शेष है। इसके लिए दिसंबर 2019 अंतिम तारीख दी गई थी। अगस्त महीना खत्म हो गया है। अब भी इसे पूरा होने में दिसंबर लगेगा।

शाही नाले की लंबाई अस्सी से लेकर कोनिया के आगे खिड़किया घाट तक 7.12 किलोमीटर है। नाले की गोलाई की परिधि के सापेक्ष व्यास अस्सी पर अपस्ट्रीम में चार फीट और डाउनस्ट्रीम कोनिया में आठ फीट है।
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जेम्स प्रिंसेप ने तैयार किया था नक्शा
काशी का ऐतिहासिक व भौगोलिक नक्शा तैयार करने वाले जेम्स प्रिंसेप के अनुसार, इसका काम वर्ष 1827 में पूरा हुआ था। इसे लाखौरी ईंट और बरी मसाला से बनाया गया था। अस्सी से कोनिया तक नाला है। यह अब भी अस्तित्व में है लेकिन उसकी भौतिक स्थिति के बारे में सटीक जानकारी किसी के पास नहीं। पुरनियों के मुताबिक यह नाला अस्सी, भेलूपुर, कमच्छा, गुरुबाग, गिरिजाघर, बेनियाबाग, चौक, पक्का महाल, मछोदरी होते हुए कोनिया तक गया है।

जल निगम के मुख्य अभियंता एके पुरवार ने बताया कि शाही नाले की सफाई का काम कराया जा रहा है। सुरक्षा को ध्यान में रखकर रोबोटिक तकनीक से काम हो रहा है ताकि नाले की सही और वास्तविक स्थिति का पता चल सके। हम लोगों का पूरा प्रयास है कि जल्द से जल्द इस काम को पूरा कराया जाए। थोड़ी बहुत दिक्कतें हैं, जिन्हें जल्द दूर कर लिया जाएगा।
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