वरुणा नदी को सीवर से मुक्त करने के साथ इसके किनारों को हराभरा करने के लिए योजना बनाई गई थी। लेकिन, ये योजनाएं परवान नहीं चढ़ सकीं। यहां कराए गए निर्माण भी अब खराब हो रहे हैं। कई जगहों की इंटरलॉकिंग तक धंस गई है। कई लोगों ने डूब क्षेत्र में निर्माण भी करा रखा है। बाढ़ आने पर मकानों का डूबना तय है। इस क्षेत्र को बेहतर ढंग से विकसित कर दिया जाए तो पर्यटन के लिहाज से बेहतर होगा।
गंगा के कटान में बांध का काम करती थी वरुणा
बीएचयू के गंगा रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार वरुणा-असि नदी का अपना मौलिक जल, गुण, मात्रा और आवेग हुआ करता था। जो नगर के भूमिगत जल स्तर को संतुलित करने के साथ ही गंगा के कटान क्षेत्र में बांध का काम करता था। ये नदियां अपनी मिट्टी को गंगा के कटाव वाले क्षेत्रों में भरकर उसे स्थिरता प्रदान करती हैं।
बोले अधिकारी
सीवर की समस्या को दूर कराया जा रहा है। जल निगम को पाइप लाइन डालने की जिम्मेदारी दी गई है। स्थलीय निरीक्षण कर समस्या दूर कराई जाएगी। - विजय नारायण मौर्य, महाप्रबंधक जलकल
एक नजर में
| 120 एमएलडी |
गोइठहां |
| 80 एमएलडी |
दीनापुर |
| 140 एमएलडी |
दीनापुर |
| 50 एमएलडी |
रमना |
| 10 एमएलडी |
रामनगर |
| 10 एमएलडी |
भगवानपुर |
| 12 एमएलडी |
बीएलडब्ल्यू |
| 10 एमएलडी |
बीएचयू |