कोरोना वायरस के संक्रमण के इस समय में बुधवार को एक बार फिर मानवता को शर्मसार करने वाली घटना हुई। पिता के सामने ही उसके जवान बेटे ने तड़प कर जान दे दी। दुर्भाग्य ने यहीं पीछा नहीं छोड़ा बल्कि शव की अंत्येष्टि के लिए भी गुहार लगानी पड़ी।
बलिया के मूल निवासी सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी हरिवंश पांडेय अपने दो बेटों के साथ शिवपुर क्षेत्र के खुशहाल नगर सेक्टर नं एक की लेन नंबर पांच में रहते हैं। तीन दिन पहले बुखार आया लेकिन लक्षण कोरोना वायरस के संक्रमण जैसा नहीं था। दोनों बेटों के साथ हरिवंश की तबीयत मंगलवार को खराब हुई तो कोरोना टेस्ट और मदद के लिए हेल्पलाइन और कंट्रोल रूम पर गुहार लगाते रह गए लेकिन मदद नहीं मिली।
नतीजतन, 40 वर्षीय बेटे की मौत हो गई। इसके बाद शव को अंत्येष्टि के लिए एक बार फिर गुहार लगानी पड़ी। विभाग के ही एक इंस्पेक्टर मदद के लिए आगे आए लेकिन वह भी खुद को असहाय रहे। हरिवंश पांडेय ने खुद को कोसते हुए कहा कि अब कहने को बचा ही क्या है और किससे गुहार लगाएं। बड़ा बेटा चला ही गया। छोटे बेटे और खुद का भी भरोसा नहीं है कि कब तक का साथ रहेगा। उधर, बुधवार को 108 नंबर की एंबुलेंस घर पहुंची लेकिन जांच न होने की बात करके उसने कहा कि हम अस्पताल तक छोड़ देंगे बाकी नहीं जानते हैं।