मुंबई, दिल्ली सहित कई बड़े शहरों में सर्विस कॉरिडोर हैं। इसके चलते यहां सड़कों की खोदाई नहीं करनी पड़ती है। वहां सड़क किनारे नाली बनी है। नाली के बाद सर्विस कॉरिडोर है। इस कॉरिडोर के ऊपर पैदल चलने वालों के लिए पाथवे बना है। कभी कोई खराबी आने पर सड़क की खोदाई नहीं करनी पड़ती है। बस बीच-बीच में बने टनल के ढक्कन को उठाकर नीचे कार्यदायी एजेंसी काम करती है।
खोदाई से टूटीं सीवर पाइप लाइनें तो मचा हड़कंप
मलदहिया में बिजली विभाग ने सीवर पाइप लाइन तोड़कर उसमें तार डाल दिया। जब सीवर ओवरफ्लो हुआ तब हड़कंप मचा। आनन-फानन में बिजली के तार को वहां से हटाया गया। इसके बाद सीवर लाइन को दुरुस्त कराया गया। पिछले दिनों कबीरचौरा में जब पाइप टूटी तो नए सिरे से मंथन हुआ।
अंग्रेजों के जमाने में बने शाही नाले की क्षमता 80 एमएलडी की है। इसके लिए दीनापुर में एसटीपी लगी है। लेकिन शहरों में बढ़ती जनसंख्या के मद्देनजर वर्तमान में 130 एमएलडी मलजल का फ्लो रोजाना हो रहा है। इससे कबीरचौरा सहित जलालीपुरा, शैलपुत्री, मछोदरी, गोलगड्डा आदि इलाके में सीवर ओवरफ्लो की समस्या वर्ष भर बनी रहती है। इससे निजात दिलाने के लिए कबीरचौरा तिराहे से चौकाघाट तक पाइप लाइन का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए 10 करोड़ 62 लाख रुपये से काम हो रहा है।
जल निगम की गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई कार्यदायी संस्था है। इस कार्य के लिए पिपलानी कटरा तिराहे से लेकर लहुराबीर चौराहे से पहले एक लेन को बंद कर दिया गया है। लहुराबीर चौराहे से होकर पहले ही एक लेन को बंद कर वाहनों को रामकटोरा की ओर भेजा जा रहा है। कबीरचौरा तिराहे पर स्थित जिला महिला अस्पताल से शाही नाले के मेन लाइन को डायवर्ट कर पिपलानी कटरा से होते हुए रामकटोरा, नाटीइमली होते हुए चौकाघाट पंपिंग स्टेशन तक जोड़ा जाएगा। करीब 800 मीटर की इस सीवर लाइन कार्य को जून 2021 तक पूरा करना है।