श्री काशी विश्वनाथ कारिडोर के लिए मकानों की रजिस्ट्री का काम लगातार जारी है। वर्तमान में हालत यह हो गई है कि रजिस्ट्री से मिलने वाला रुपया अब रिश्तों पर भी भारी पड़ने लगा है। भाई-बहन, चाचा भतीजा और भाई-भाई एक दूसरे को पहचानने से इंकार कर रहे हैं।
विश्वनाथ मंदिर के कार्यालय में रोजाना रजिस्ट्री के लिए पहुंच रहे मामलों से इस बात का खुलासा हुआ है। इससे आजिज आकर अधिकारी अब फैमिली ट्री बनाकर रजिस्ट्री करा रहे हैं। बिना फैमिली ट्री के किसी भी मकान की रजिस्ट्री नहीं हो रही है।
साढ़े छह सौ करोड़ रुपये की श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर परियोजना के लिए भवनों की खरीद प्रक्रिया सुस्त गति से चल रही है। कॉरिडोर के लिए 166 भवनों की खरीद और अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की जानी है। अब तक 79 से अधिक भवनों की रजिस्ट्री कराई जा चुकी है और इसमें से 34 भवनों का ध्वस्तीकरण भी कराया जा चुका है।
दो सप्ताह पहले पक्कामहाल के रहने वाले राजेश अपनी मकान की रजिस्ट्री कराने पहुंचे। उन्होंने फैमिली ट्री में अपनी बहन का जिक्र नहीं किया। बहन को जब सूचना मिली तो वह भी मौके पर पहुंच गई। भाई ने बहन को पहचानने से इंकार कर दिया।
राजेश की पत्नी ने तो सिरे से नकार दिया कि वह उसकी ननद है। बहन ने जब कागजात दिखाए तब जाकर मंदिर प्रशासन ने नई फैमिली ट्री बनाकर रजिस्ट्री की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। यह तो महज बानगी भर है।