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अस्पताल का वार्ड बना पार्किंग, बेड पर सो रहा कुत्ता

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वाराणसी। सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुविधाओं का कितना ख्याल रखा जा रहा है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दिन में तो नहीं बल्कि रात में अस्पताल के वार्ड पार्किंग बन जा रहे हैं। बेड पर मरीज भी है तो कुत्ते भी सो रहे हैं।
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इमरजेंसी वार्ड की हकीकत है कि यहां एक ही कर्मचारी के ऊपर वार्ड के मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी है। कड़ाके की ठंड में भी कई मरीजों को गलियारे में रखा गया है, रखा गया है जबकि अस्पताल के वार्डों में बेड भी खाली है। मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी संभालने वाले कर्मचारी भी वार्डों में सो रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा की किस तरह से देखभाल की जा रही है, इस पर भी सवाल खड़ा होने लगा ह्रै।
रात-11.30 -महिला अस्पताल कबीरचौरा
गलियारे में सोती मिली गर्भवती महिलाएं
कड़ाके की इस ठंड में कोशिश यही की जाती है कि मरीजों को ठंड से बचाया जाए, इसके लिए उन्हें वार्ड में ही भर्ती किया जाए। बृहस्पतिवार की रात महिला अस्पताल कबीरचौरा में पुराने ऑपरेशन थिएटर के पास दो गर्भवती महिलाएं गलियारे में सोती मिली। पूछने पर बताया कि अंदर कमरे में बेड भरा है, इस वजह से बाहर ही बेड मिला है। हालांकि महिलाएं ठंड से बचाव के लिए कंबल ओढ़कर लेटी थी लेकिन अगर उन्हें गलियारे के बजाय कही और कमरे में जगह मिल जाती तो शायद राहत मिलती। वार्ड के बाहर परिजनों के सोने के लिए बने टीनशेड पर मोटे पर्दे भी लगवाए गए हैं, जिससे कि परिजनों को आराम मिले।
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रात: 11.40 बजे बीएचयू अस्पताल
ड्यूटी पर मुस्तैद दिखे सुरक्षाकर्मी
बीएचयू अस्पताल की इमरजेंसी में अन्य दिनों की अपेक्षा बृहस्पतिवार को थोड़ा सन्नाटा दिखा। यहां अंदर डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ के साथ ही बाहर सुरक्षाकर्मी भी ड्यूटी पर मुसतैद दिखे। रात में कुछ मरीजों के परिजन बाहर खड़े होकर बातचीत करते रहे तो कुछ डॉक्टर से अपने मरीज का हाल जानने में लगे रहे।
रात 11.45 बजे मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा
वार्डों में सोते मिले ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी
मंडलीय अस्पताल की इमरजेंसी में डॉक्टर तो मौजूद मिले लेकिन वार्ड में भर्ती मरीजों की जिम्मेदारी संभालने के लिए महज एक ही महिला कर्मचारी रही। पूछने पर दो कर्मचारी की ड्यूटी की जानकारी दी लेकिन एक कहा हैं, उनका पता नहीं चला। यहीं पंजीकरण काउंटर कक्ष में एक कर्मचारी हीटर जलाकर बैठे रहे। हालांकि इमरजेंसी को छोड़ अन्य वार्डों का हाल ही अलग था।
वार्ड छह में मरीज तो बेड पर थे ही, यहां कुत्ता भी आराम फरमाता मिला। इसके बाद वार्ड नंबर एक में भी गलियारे में तीन मरीज सोते मिले और यहां एक नहीं बल्कि दो-दो गाड़ियां इस तरह से खड़ी रही जैसे कि कोई पार्किंग स्थल हो। इस तरह की स्थिति अन्य वार्डों की भी रही। वहां भी गाड़ियां खड़ी रही। इसके अलावा रात्रिकालीन ड्यूटी में लगे कर्मचारी भी ड्यूटी रूम बंद कर सोते मिले।
इमरजेंसी सहित अन्य वार्डों में ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को मुस्तैद रहने का निर्देश दिया गया है। अब वार्डों में गाड़ियां खड़ी कैसे हो रही हैं, बेड पर कुत्ता कैसे सो रहा है। इस बारे में कर्मचारियों से पूछताछ होगी। मरीजों को गलियारे में भर्ती करने के बारे में भी जानकारी ली जाएगी।
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-डॉ. प्रसन्न कुमार, एसआईसी, मंडलीय अस्पताल
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