होम्योपैथी चिकित्सा का ही वैकल्पिक रूप है। यह सम: समम शमयति या समरूपता दवा सिद्धांत पर आधारित है। विश्व होम्योपैथी दिवस डॉ. हैनिमैन की जयंती के अवसर पर 10 अप्रैल को मनाया जाता है।
केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद के अनुसार यह दवाओं द्वारा रोगी का उपचार करने की एक ऐसी विधि है, जिसमें किसी स्वस्थ व्यक्ति में प्राकृतिक रोग का अनुरूपण करके समान लक्षण उत्पन्न किया जाता है, जिससे रोगग्रस्त व्यक्ति का उपचार किया जा सकता है। इस पद्धति में रोगियों का उपचार न केवल होलिस्टिक दृष्टिकोण के माध्यम से बल्कि रोगी की व्यक्तिवादी विशेषताओं को समझ कर किया जाता है। होम्योपैथिक दवाएं प्रभावी और रुचिकर हैं। इनका कोई प्रतिकूल पाश्र्व प्रभाव नहीं है और इनका आसानी से सेवन किया जा सकता है। होम्योपैथी में लक्षणों के आधार पर मानव के संपूर्ण रोगों का निदान किया जाता है। होम्योपैथिक दवाएं अत्यंत सूक्ष्म मात्रा में शक्तिकृत रूप में दी जाती है। कोरोना महामारी में भी लोगों की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि कर कोरोना से निदान में महती भूमिका निभाई। होम्योपैथी चिकित्सा अधिकारी डॉ. रचना श्रीवास्तव ने बताया कि विश्व होम्योपैथी दिवस केवल डॉ. हैनिमैन की जयंती के उपलक्ष्य में ही नहीं मनाया जाता बल्कि होम्योपैथी को आगे ले जाने की चुनौतियों और भविष्य की रणनीतियों को समझने के लिए भी मनाया जाता है। इसका उद्देश्य चिकित्सा की इस अलग प्रणाली के बारे में जागरूकता पैदा करना और सभी तक इसकी पहुंच की सफ लता दर को आसानी से बेहतर बनाना है।