काशी की सबसे प्राचीन होलिका शीतलाघाट और कचौड़ी गली की होलिका का इतिहास 14वीं शताब्दी से मिलता है। प्राचीनता की बात करें तो काशी की पहली होलिका शीतला घाट पर ही जलाई जाती है। ये परंपरा आज तक कायम है।
ढुंढिराज गणेश की होलिका में अन्न को भी अर्पित करने की परंपरा है। यहां लकड़ी और कंडे के साथ नौ तरह के अन्न अर्पित किए जाते हैं। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर तो शवदाह से बची हुई वस्तुओं से होलिका तैयार होती है। भदैनी की होलिका का इतिहास काशी में पेशवाओं के आने से पहले का मिलता है।