ओलंपियन राहुल सिंह ने बताया कि काशी को हॉकी की दृष्टि में दो भागों में बांटकर देखा जाता था। उधर वरुणा पार हॉकी खेली जाती थी जबकि इस पार नदसेर की तरफ हॉकी के दूसरे खेल भी होते थे। वरुणा पार जिला मुख्यालय की तरफ पन्नालाल पार्क (वर्तमान वीडीए ऑफिस), कमिश्नरी का मैदान, पुलिस लाइन, यूपी कॉलेज में हॉकी का खेल मैदान था। बताया कि यहां के खिलाड़ी मेरठ के पंडित सोहन लाल की हॉकी स्टिक से खेलते थे। यह स्टिक चौक और लहुराबीर के दुकानों पर मिलती थी। आज के समय में जिले में दो टर्फ के मैदान बीएचयू और लालपुर में हैं जबकि तीसरा टर्फ यूपी काॅलेज में बन रहा है।
वरुणा के दूसरी तरफ के मैदान
कटिंग मेमोरियल, बीएचयू, सिगरा, और बरेका में हॉकी खेली जाती थी। सिगरा में भारत और जापान के बीच हॉकी मैच 1987 में खेला गया था। आज जिले में दो हॉकी टर्फ बनकर तैयार हैं। वहीं तीसरा टर्फ यूपी कॉलेज में बन रहा है।
सौ साल में एक परिवार से निकले दो ओलंपियन
- मोहम्मद शाहिद 1980, 1984, 1988 तीन ओलंपिक में खेले
- विवेक सिंह 1988 ओलंपिक में और इनके परिवार के ही राहुल सिंह 1996 ओलंपिक में खेलें।
- ललित उपाध्याय 2020, 2024 ओलंपिक में
काशी में शुरुआत कलात्मक हॉकी से हुई यह घास के मैदान पर खेली जाती थी, अब टर्फ पर तकनीकी हॉकी में भी यहां के खिलाड़ी अच्छा कर रहे है। काशी दो बेटियां पूजा और पूर्णिमा राष्ट्रीय स्तर पर नाम कर रहीं है। -डॉ. एके सिंह, अध्यक्ष, हॉकी वाराणसी