इस मौसम में इन्फ्लूएंजा के साथ अन्य वायरस भी प्रभावी होते है। घबराने की जरूरत नहीं है। सर्दी, खांसी, बुखार, जुकाम हो तो बिना डॉक्टर की सलाह के न तो जांच कराएं और न ही कोई दवा लें। घर से बाहर निकलने पर खास सतर्कता बरतनी चाहिए।- प्रो. गोपालनाथ, माइक्रोबायोलॉजी विभाग, बीएचयू
बच्चों में बढ़ जाती है निमोनिया की समस्या
देश में जो भी केस आए हैं, उनमें बच्चों की संख्या ज्यादा है। इस मौसम में बच्चों में बुखार, सर्दी, खांसी, जुकाम के साथ ही निमोनिया होने की संभावना बढ़ जाती है। दो दिन से ज्यादा समय तक बुखार न छोड़े तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। -प्रो. सुनील कुमार राव, बाल रोग विशेषज्ञ, बीएचयू
एचएमपीवी एक आरएनए वायरस है। इसके प्रभाव से बच्चों में बुखार, खांसी, सांस का तेज चलना और कुछ केस में ऑक्सीजन में गिरावट भी देखने को मिल रही है। वैसे तो पांच साल से कम उम्र वाले बच्चों पर इसका असर ज्यादा है, लेकिन 15 साल तक के बच्चों, 65 साल से ऊपर के बुजुर्गों को सेहत को लेकर सतर्क रहना चाहिए। बच्चों को नियमित टीकाकरण करवाते रहना चाहिए। ऐसा इसलिए कि टीकाकरण से उनके शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहती है। - डॉ. आलोक कुमार भारद्वाज, पूर्व अध्यक्ष, भारतीय बाल अकादमी वाराणसी शाखा
ये बरतें सावधानी
- पांच साल तक के बच्चों को अगर बुखार हो तो ऑक्सीजन की नियमित जांच करते रहना चाहिए।
- बच्चों को भीड़ भाड़ वाली जगह पर ले जाने से बचें।
- अगर घर में किसी को बुखार या जुकाम है तो उसको लेकर भी सतर्क रहना चाहिए।
- बिना चिकित्सकीय सलाह के बच्चों को दवा न दें और तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।